वक्फ बोर्ड में दर्ज 100 नंबर रजिस्ट्रेशन के बाबत कोई भी सबूत नहीं है। धार्मिक स्वरूप के मुद्दे पर कहा कि वेद, शास्त्र, उपनिषद, स्मृति, पुराण से साबित है कि पूरी प्रापर्टी मंदिर की है और जबरदस्ती घुस आने व नमाज पढ़ लेने से मस्जिद की संपत्ति नहीं हो जाती है।
उन्होंने कहा कि हमारे अधिकार का अतिक्रमण किया गया। वर्ष 1993 से पूर्व ब्यास जी तहखाने में और जगह-जगह पर पूजा करते थे। बाद में बैरिकेटिंग कर जबरन रोक दिया गया। विश्वनाथ मंदिर एक्ट के सेक्सन 5 के तहत यह प्रापर्टी देवता में निहित हो गई, तब विशेष धर्म उपासना स्थल कानून लागू नहीं हो सकता।
दलील में कहा कि ऑर्डर 7 रूल 11 के आवेदन में जो बात कही गई है, उसी पर कोर्ट विचार करेगी, इसके इतर विपक्षी जो भी बात कहेंगे उस पर विचार का कोई औचित्य नहीं है। जिन स्थलों पर पूजा करने का अधिकार विशेष धर्म उपासना स्थल एक्ट 1991 आने से पहले पूजा का अधिकार प्राप्त था। उन स्थलों पर यह एक्ट प्रभावी नहीं है। वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन ने बहस पूरी कर ली और अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 18 जुलाई नियत कर दी।
उस दिन वादिनी राखी सिंह की तरफ से अधिवक्ता मानबहादुर सिंह, शिवम गौड़ व अनुपम द्विवेदी बहस जारी रखेंगे। अदालत में सुनवाई के दौरान डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय, डीजीसी फौजदारी आलोक चंद्र शुक्ल, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के अधिवक्तागण अभयनाथ यादव, रईस अहमद, वादिनी गण व उनके अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी, सुभाषनंदन चतुर्वेदी, पंकज कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।