तीखी धूप के साथ ही लू चलने लगी है। ऐसे मौसम में पेट संबंधी बीमारी, डिहाइड्रेशन की समस्या तो आम है, लेकिन नस संबंधी बीमारी का खतरा भी बढ़ गया है। ब्रेन स्ट्रोक, मिर्गी की समस्या बढ़ गई है। बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में ऐसे पीड़ित पहुंच रहे हैं। जांच के बाद पता चल रहा है कि उनकी दिमाग की नसें सूख रहीं हैं। इस कारण झटका भी आ रहा है। दिल भी सामान्य गति से तेज धड़कने लगता है। बीएचयू में हर दिन ऐसे 30 से 40 लोग आ रहे हैं।
मार्च महीने के तीसरे सप्ताह से मौसम तेजी से बदला है। तापमान में भी पिछले एक सप्ताह से लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में आने वाले ऐसे पीड़ितों में 20 से 40 साल तक के युवाओं के साथ बुजुर्ग भी आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार गर्मी का मौसम बेहद सतर्कता बरतने वाला होता है।
सही से नहीं होता ब्लड सर्कुलेशन
बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि गर्मी के समय दिमाग की नसें सूखने लगतीं हैं। इस कारण ब्लड सर्कुलेशन सही तरह से नहीं हो पाता है। चिकित्सकीय भाषा में इसको डी माइलिनेशन कहते हैं। इस वजह से झटका आना, आंखों की रोशनी कमजोर होना, मिर्गी, दिमागी दौरा आने लगता है। 300 से 400 मरीजों वाली ओपीडी में इन दिनों 30 से 40 मरीज मौसम की मार की वजह से परेशान होकर आ रहे हैं।