पिछले कई दिनों से तेज धूप और ठंड कम होने के बाद बुधवार को मौसम अचानक बदल गया। पहाड़ों पर बर्फबारी और सर्द हवाओं के चलते एक बार फिर पूर्वांचल ठंड की चपेट में है। आसमान में घने बादल छाए हुए हैं। धूप नहीं निकलने और सर्द हवाओं के चलने से ठंड बढ़ गई।
इसके चलते पारा भी सात डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। जगह-जगह बूंदाबांदी भी हुई। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक वाराणसी सहित पूर्वांचल के जिलों में एक-दो दिन बारिश के आसार हैं।
मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि मंगलवार को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था।
बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो. एसएन पांडेय के अनुसार 15 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से उत्तर पश्चिमी हवाएं चल रही हैं। कोल्ड फ्रंट का असर कम से कम दो दिन तक रहेगा। बादल छंटने के बाद गलन के साथ कोहरे का भी असर बढ़ेगा और न्यूनतम तापमान में भी गिरावट आएगी।
बारिश तो ठीक मगर ओले की आशंका से बेचैनी
बारिश
जिन किसानों ने गेहूं की बोवाई पीछे की है, उनके लिए बारिश फायदेमंद होगी लेकिन बदले मौसम में ओलावृष्टि की आशंका ने किसानों की बेचैनी बढ़ा दी है। बीएचूय के कृषि विज्ञानी प्रो आरपी सिंह कहना है कि बारिश से गेहूं की खेती के लिए फायदा होगा। दलहनी फसलों के लिए भी बारिश अभी लाभकारी होगी।
रोहनिया क्षेत्र के दरेखू के किसान सुधाकर पांडेय. रविशंकर सिह, वरुणापति उपाध्याय, अखरी के नारायणी सिह, दयानंद तिवारी ने बताया कि बारिश गेहूं के लिए काफी फायदेमंद होगी। बारिश से गेहूं, चना, सरसों की फसलों को काफी फायदा होगा लेकिन यदि कहीं ओलावृष्टि हुई तो फसल बर्बाद हो जाएगी। किसान गोपीनाथ, सुशील सिंह, मुकेश सिंह, पवन, सुनील यादव ने बताया कि तेज हवा और ओले की आशंका ने चिंताएं बढ़ा दी हैं।
आकाशवाणी वाराणसी के कृषि कार्यक्रम के अधिशासी अधिकारी दिनेश सिंह ने बताया कि दो-एक दिन की बारिश से फसलों को फायदा पहुंचेगा लेकिन बादल अधिक दिन तक छाए रहे तो सरसों में माहो का प्रकोप हो सकता है।
पंजाब नेशनल बैंक नागेपुर के कृषि अधिकारी श्रीराम ने बताया कि बारिश और बादल के बाद फसलों में रोग का प्रकोप हो सकता है। खासकर सरसों, चना आदि की खेती करने वाले किसानों को सुरक्षात्मक उपाय अपनाकर फसलों को बचाना होगा।