बीमारियों को लेकर बढ़ी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 12 हजार की आबादी इसी पानी का उपयोग करने को मजबूर है। लोगों का आरोप है कि इसके सेवन से त्वचा पर काले धब्बे, खुजली, कब्ज, गैस, एसिडिटी समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
प्रधान प्रतिनिधि अवधेश यादव ने बताया कि धरम्मरपुर और आसपास के गांवों में पानी की गुणवत्ता लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है।
सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर भीम सिंह यादव ने कहा कि गांव में रहने के दौरान उन्हें भी त्वचा संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
वहीं आशा कार्यकत्री लक्ष्मीना देवी ने क्षेत्र में पेट और त्वचा रोगों के बढ़ते मामलों की ओर ध्यान दिलाया।
सामाजिक कार्यकर्ता अनिल यादव समेत कई ग्रामीणों ने करकटपुर में अधूरी पड़ी पानी की टंकी का निर्माण कार्य पूरा कराकर शुद्ध पेयजल आपूर्ति शुरू करने की मांग की है।
पानी में रहता है पीलापन।
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जांच के बाद होगी कार्रवाई
सहायक खंड विकास अधिकारी करंडा जयप्रकाश पांडेय ने बताया कि वीडीओ को भेज कर पेयजल के नमूनों की जांच कराई जाएगी और वह स्वयं भी क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जल निगम ने आर्सेनिक मिलने से किया इनकार
अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण) राजीव कुमार ने बताया कि करंडा क्षेत्र के पानी के नमूनों की पूर्व में लैब जांच कराई गई थी, जिसमें आर्सेनिक नहीं मिला था। फिर भी ग्रामीणों की शिकायत को देखते हुए दोबारा सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण चाहें तो स्वयं भी पानी का नमूना विभाग की प्रयोगशाला में जांच के लिए उपलब्ध करा सकते हैं।
पूर्वांचल में फिर गहराई भूजल की चिंता
पूर्वांचल के कई जिलों में भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी को लेकर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। करंडा क्षेत्र के ग्रामीणों की शिकायतों ने एक बार फिर भूजल की गुणवत्ता और ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।