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छह गांवों में जहर बन रहा पानी: आर्सेनिक की आशंका से 12 हजार ग्रामीण सहमे, बीमारियों का दावा; जांच की मांग

Fri, 26 Jun 2026 05:27 AM IST
Aman Vishwakarma अमित उपाध्याय, अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

Ghazipur News: गाजीपुर के छह गांवों में पेयजल में आर्सेनिक की आशंका से करीब 12 हजार ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों का दावा है कि दूषित पानी के कारण त्वचा और पेट संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। लोगों ने पानी की गुणवत्ता की जांच कराने और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रशासन से जल्द कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।
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आर्सेनिक की आशंका से 12 हजार ग्रामीण सहमे। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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UP News: विकास खंड करंडा के कई गांवों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। धरम्मरपुर ग्राम पंचायत के करकटपुर, बलवंतपुर, कोटिया, सरैया, हंसराजपुर, धरम्मरपुर और टेढ़वा समेत आसपास के गांवों के लोगों ने पानी में आर्सेनिक की अधिक मात्रा होने की आशंका जताते हुए जिलाधिकारी से जांच कराने और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से दूषित पानी के उपयोग के कारण क्षेत्र में त्वचा और पेट संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि कई गांवों में हैंडपंप और नलों से निकलने वाला पानी कुछ समय बाद पीला पड़ जाता है तथा बर्तनों में रखने पर उसमें परत जमने लगती है।

ग्रामीणों के अनुसार करकटपुर में आर्सेनिक की मात्रा 100 पीपीबी से अधिक, बलवंतपुर और कोटिया में 500 पीपीबी तक तथा धरम्मरपुर मुख्य बस्ती में 800 से 1000 पीपीबी तक होने की जानकारी मिली है। हालांकि इन दावों की अभी तक किसी अधिकृत सरकारी जांच रिपोर्ट से पुष्टि नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार पेयजल में आर्सेनिक की सुरक्षित सीमा 10 पीपीबी निर्धारित है।

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बीमारियों को लेकर बढ़ी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 12 हजार की आबादी इसी पानी का उपयोग करने को मजबूर है। लोगों का आरोप है कि इसके सेवन से त्वचा पर काले धब्बे, खुजली, कब्ज, गैस, एसिडिटी समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।

बोले लोग

प्रधान प्रतिनिधि अवधेश यादव ने बताया कि धरम्मरपुर और आसपास के गांवों में पानी की गुणवत्ता लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है।

सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर भीम सिंह यादव ने कहा कि गांव में रहने के दौरान उन्हें भी त्वचा संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ा था।

वहीं आशा कार्यकत्री लक्ष्मीना देवी ने क्षेत्र में पेट और त्वचा रोगों के बढ़ते मामलों की ओर ध्यान दिलाया।

सामाजिक कार्यकर्ता अनिल यादव समेत कई ग्रामीणों ने करकटपुर में अधूरी पड़ी पानी की टंकी का निर्माण कार्य पूरा कराकर शुद्ध पेयजल आपूर्ति शुरू करने की मांग की है।

पानी में रहता है पीलापन। - फोटो : संवाद
जांच के बाद होगी कार्रवाई
सहायक खंड विकास अधिकारी करंडा जयप्रकाश पांडेय ने बताया कि वीडीओ को भेज कर पेयजल के नमूनों की जांच कराई जाएगी और वह स्वयं भी क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जल निगम ने आर्सेनिक मिलने से किया इनकार
अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण) राजीव कुमार ने बताया कि करंडा क्षेत्र के पानी के नमूनों की पूर्व में लैब जांच कराई गई थी, जिसमें आर्सेनिक नहीं मिला था। फिर भी ग्रामीणों की शिकायत को देखते हुए दोबारा सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण चाहें तो स्वयं भी पानी का नमूना विभाग की प्रयोगशाला में जांच के लिए उपलब्ध करा सकते हैं।
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पूर्वांचल में फिर गहराई भूजल की चिंता
पूर्वांचल के कई जिलों में भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी को लेकर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। करंडा क्षेत्र के ग्रामीणों की शिकायतों ने एक बार फिर भूजल की गुणवत्ता और ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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