UP News: काशी की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर स्थान मिलने के बाद अब धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को भी आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने की तैयारी है। इसमें भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली पर लगा पीपल का वृक्ष प्रमुख है। यह बोध गया में भगवान बुद्ध को जिस पवित्र वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था, उसकी तीसरी पीढ़ी है।
तथागत की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ के बोधि वृक्ष (पीपल) को देश की विरासत के रूप में सहेजा जाएगा। इतना ही नहीं ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक महत्व वाले प्रदेश के 948 पुरातन वृक्षों को चुनकर उन्हें 11 जिलों में ‘विरासत वन’ का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके लिए बनारस के सबसे ज्यादा 98 पुराने वृक्ष चिह्नित किए गए हैं, जिनकी टहनियों, तने या बीज से नई पौध तैयार कर चयनित जिलों में जगह के हिसाब से विरासत वन या वाटिका आबाद की जाएगी। जल्द ही इन पेड़ों के बीज, तने या टहनियां भेजने का काम शुरू होगा।
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काशी की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर स्थान मिलने के बाद अब धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को भी आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने की तैयारी है। इसमें काशी के इतिहास में अथवा धार्मिक-पौराणिक पटल पर अहम स्थान रखने वाले 100 वर्ष के आसपास या उससे अधिक उम्र के वृक्षों की नई पीढ़ियां तैयार की जाएंगी। इसके लिए राज्य सरकार ने प्रदेश भर के 948 पुराने वृक्षों को चिह्नित किया है, जिनके बीज, तने या टहनियों की मदद से प्रदेश के 11 जिलों में विरासत वन तैयार किए जाएंगे।
वैज्ञानिक रूप से पुराने वृक्षों के जीन अच्छे माने जाते हैं, इसलिए उन्हें बढ़ावा देने के लिए पेड़ की प्रजनन प्रकृति के मुताबिक बीज या तने और टहनियों की कटिंग से नई पौध तैयार की जाएगी। इसमें भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली पर लगा पीपल का वृक्ष प्रमुख है। यह बोध गया में भगवान बुद्ध को जिस पवित्र वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था, उसकी तीसरी पीढ़ी है। इसे श्रीलंका से लाकर तथागत के प्रथम उपदेश स्थल पर लगाया गया था। इसी तरह जिले के लगभग 98 पुराने वृक्ष चुने गए हैं।
विरासत वन के लिए चुने गए वृक्ष
अर्जुन, आम, पीपल, इमली, कुसुम, गूलर, पाकड़, बरगद, जामुन, नीम और शीशम आदि।
बोले अधिकारी
वाराणसी की डीएफओ स्वाति ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के पुराने वृक्षों को भविष्य के लिए भी सहेजा जाए। चयनित वृक्षों से विरासत वाटिका बनाई जाएगी। इसके लिए चिह्नित वृक्षों की टहनिया या बीज चयनित जिलों में भेजे जाएंगे।