कार्यशाला में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी
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बीएचयू में जियो अर्बन विषय पर सोमवार को शुरू हुई छह दिनों की कार्यशाला में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भूगोल विषय अब नागरिक इंजीनियरिंग और रिमोट सेंसिंग का अभिन्न विषय बन गया है। भूगोल विभाग में कार्यशाला 24 जनवरी तक चलने वाली इस कार्यशाला में कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि प्राकृतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग, तकनीक, सामाजिक विज्ञान और कला जैसे कई क्षेत्रों से इसके सशक्त अंर्तसंबंध है।
यदि किसी भी विषय का मानचित्र बनाया जाए तो भूगोल की सीमाएं सर्वाधिक विषयों से जुड़ी हुई दिखाई देगी। यह विभाग शैक्षणिक उत्कृष्टता के अपने 80वें वर्ष की ओर अग्रसर है। कुलपति प्रो. वीसी झा ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल ट्विन्स (रियल टाइम डेंटा सेंसर) जैसी उभरती तकनीक डिसीजन मेकिंग, आपदा को कम करने और सतत शहरी शासन के लिए जरूरी हैं।
17 राज्यों से आए हैं भूगोलवेत्ता
प्रो. अमित कुमार ने कार्यशाला में देश के 17 राज्यों की 29 संस्थाओं से आए 52 भूगोलवेत्ता और प्रतिभागी बीएचयू में आए हैं। इसमें आईआईटी, इसरो–एनआरएससी, दिल्ली विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सांता बारबरा और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), भोपाल जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के विशेषज्ञ जुड़े हैं।
कार्यशाला में शहरी की स्थितियों, बेहतर विकास और आपदा जोखिम करने के साथ ही लोकेशन आधारित कार्यों को आगे बढ़ाना है। विज्ञान के संकाय प्रमुख प्रो. आर के श्रीवास्तव ने पृथ्वी विज्ञान की शैक्षणिक विरासत पर बात की। कार्यशाला में आए विद्वानों ने शहरी करण की बढ़ती गति और जोखिम से छात्र और छात्राओं को रूबरू कराया।