वाराणसी। पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि कोरोना की विषम परिस्थितियों ने हमें करो ना की प्रेरणा देते हुए चिंतन के साथ सृजन का मार्ग प्रशस्त कराया है। ललित कला में दार्शनिक और व्यावहारिक पक्ष दोनों हैं। आज वर्तमान चुनौतियों को स्वीकार करके कला के व्यावसायिक करण में कला और कलाकार को महत्व दिया जाना आवश्यक हो गया है। वह बुधवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के डॉ. विभूति नारायण सिंह परिसर के ललित कला विभाग के दृश्य कला, कौशल, संचार एवं प्रबंधन विषय पर आयोजित वेबिनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि वेबिनार से कला के विविध आयामों में रचनात्मक अभिवृद्धि से निरंतर पारदर्शिता आ रही है। वेबिनार में मूर्धन्य कला विद्वानों को देखना ओर सुनना सौभाग्य के साथ आनंद की अनुभूति देता है। डॉ. सुनील विश्वकर्मा ने कहा कि विज्ञापन मांग को आवश्यकताओं में बदल देता है। इस दौरान टाइपोग्राफर राजीव खरे, आईआईटी हैदराबाद के दीपक जान मैथ्यू, बीएचयू के प्रो. हीरालाल प्रजापति, डॉ. मनीष अरोड़ा, खैरागढ़ विश्वविद्यालय के डॉ. आनंद कुमार जायसवाल ने संबोधित किया।
संयोजन सुमित घोष, संचालन डॉ. शशिकांत नाग और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नंदू सिंह ने किया। वेबिनार में कुलगीत गायन की प्रस्तुति गंगापुर परिसर की छात्रा रागेश्री प्रकाश ने किया। तबले पर दीपक सिंह एवं हारमोनियम पर रमा सिंह रहीं। वेबिनार में गौरव दुबे, डॉ. अर्चना पांडेय, प्रशांत विश्वकर्मा, आकाश सेठ, डॉ. लक्ष्मी नारायण, डॉ. मनीष कुमार सिंह ने सहयोग किया।