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पशु तस्करी मामले में थाना प्रभारी हुए लाइनहाजिर, तस्करों के साथ 'सेटिंग' का ऑडियो हुआ था वायरल

Tue, 25 Sep 2018 12:42 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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यूपी पुलिस
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पशु तस्करों से सेटिंग के बाबत वायरल हुए ऑडियो में वाराणसी एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने कड़ा एक्शन लिया है। मंगलवार अहले सुबह  मिर्जामुराद थाना प्रभारी विश्वजीत प्रताप सिंह को लाइनहाजिर करते दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच बैठा दी है। सीओ कैंट एएसपी अनिल कुमार को मामले की जांच सौंपी गई है।

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माना जा रहा है कि जल्द ही अन्य पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी। एसएसपी के कारवाई से हाइवे पर पशुतस्करी में लिप्त कर्मियों में हड़कंप मचा है। वाराणसी में पुलिस के संरक्षण में गोवंश और मवेशियों की तस्करी कर उन्हें पश्चिम बंगाल तक पहुंचाया जा रहा है।

हाइवे के किनारे के मिर्जामुराद और रोहनिया थाने के साथ ही अमरा अखरी, रमना व भीटी पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों की कार्यशैली गंभीर सवालों के घेरे में है। सोमवार को मिर्जामुराद थाने के एक सिपाही और तस्करों के लेनदेन की बातचीत की ऑडियो क्लिप व्हाट्स ऐप पर वायरल हुई तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। प्रकरण के संबंध में एसएसपी ने बुधवार की देर रात मिर्जामुराद थाना प्रभारी विश्वजीत प्रताप सिंह को लाइनहाजिर  कर दिया। 

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क्या कहा गया था वायरल ऑडियो में..?

वायरल ऑडियो क्लिप के अनुसार मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में शनिवार को मवेशियों से भरे दो ट्रक पकड़े गए थे। कार्रवाई की बजाय थाने के सिपाही ने सौदेबाजी शुरू कर दी और दो से पांच लाख रुपये के बीच मसला सुलझाने का सिलसिला 48 घंटे तक जारी रहा। सौदा तय नहीं हुआ तो बातचीत की ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई।  

मीडिया को भनक लगने पर सभी खजुरी पुलिस चौकी के समीप पहुंचे और ट्रक व मवेशियों की फोटो खींचने लगे। यह देख पुलिस नेे आननफानन में मामले का पटाक्षेप करते हुए 61 मवेशियों के साथ तीन आरोपियों की गिरफ्तारी दिखा दी। आरोपियों में औरेया जिले के जमालशाह के शोएब अली और कौशांबी जिले के पुरामुफ्ती के हटवा उपरहार के मोहम्मद यासीन व मंझनपुर के मोहम्मद शमीम शामिल हैं।  ऑडियो क्लिप वायरल होने के कारण मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी आ गया। 
 

थाने को प्रति माह पांच लाख, चौकी को 50 हजार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मवेशियों की तस्करी को लेकर बेहद ही सख्त हैं लेकिन पुलिस को इससे खास मतलब नहीं है। पशु तस्करों ने प्रति माह थानों का पांच लाख रुपया और पुलिस चौकी का 50 हजार रुपया तय कर रखा है। मिर्जामुराद थाने का चिह्नित सिपाही और रोहनिया थाने का चिह्नित दरोगा पशु तस्करों और जिले के थानाध्यक्षों व चौकी प्रभारियों की बातचीत तय कराते हैं। इसके बाद भदोही से चंदौली जिले की सीमा तक पशु तस्करों का वाहन धड़ल्ले से गुजरता है। 
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तस्करों की शर्तों का पालन करती है पुलिस

पुलिस से बातचीत तय होने के बाद पशु तस्कर उनसे अपनी शर्तों का पालन भी कराते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार पशु तस्करी के अवैध धंधे में प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है। ऐसे में जब कोई पशु तस्कर अपने वाहनों को पास कराने के लिए पुलिस को पैसा देता है तो दूसरे तस्कर के वाहनों के बारे में सूचना देकर उन्हें पकड़वाता भी है। कार्रवाई के नाम पर बीच-बीच पर में पुलिस इन्हीं को पकड़ कर अपनी पीठ थपथपाती है।
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