वाराणसी के मणिकर्णिका घाट स्थित काशी गेस्ट हाउस में ठहरे इंग्लैंड के साउथहैम्पटन निवासी मैकमहोन केविन जान (52) की रविवार देर रात कमरे के शौचालय में संदिग्ध हाल में मौत हो गई। जान के साथ ठहरी अमेरिकी नागरिक कैथरीन (47) की सूचना पर गेस्ट हाउस संचालक पुल्लू साव ने चौक पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने नई दिल्ली स्थित इंग्लैंड के दूतावास को सूचित कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। कैथरीन के अनुसार जान पैर, सीने, पेट, किडनी सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीडि़त थे। पेट दर्द के साथ ही जान की हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई।
मैकमोहन केविन जान ने 18 सितंबर को काशी गेस्ट हाउस में कमरा लिया था। जान के साथ कैथरीन भी उनके कमरे में ठहरी हुई थीं। रविवार की रात में किसी समय जान शौचालय गए और वहीं उनकी मौत हो गई। कैथरीन के अनुसार जान को खून की उल्टी हो रही थी और वह पेट दर्द से बुरी तरह से तड़प रहे थे।
कैथरीन ने बताया कि वह दोनों नई दिल्ली में मिले थे और गोवा, अजमेर होते हुए वाराणसी आए। दोस्ती हो जाने के कारण दोनों साथ ही ठहरे थे और काशी भ्रमण कर रहे थे। जान की मौत की सूचना मिलने पर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के अधिकारी गेस्ट हाउस पहुंचे और संचालक पुल्लू के साथ ही कैथरीन से घंटों पूछताछ की। इस संबंध में इंस्पेक्टर चौक ने बताया कि ब्रिटिश दूतावास को सूचित कर दिया गया है।
महिला मित्र बोली नहीं मिली मदद, पुलिस की आशंका अलग
अमेरिकी नागरिक कैथरीन (47)
- फोटो : अमर उजाला
ब्रिटिश नागरिक जान के साथ ठहरी कैथरीन ने बताया कि जब उनके दोस्त की तबीयत खराब हुई और वो तड़प रहा था तो उन्होंने मदद की गुहार लगाई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। यदि समय से उपचार मिल गया होता तो शायद जान की जान बच गई होती।
कोई पैरामेडिकल स्टाफ आया था लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहीं, पुलिसकर्मियों ने आशंका जताई कि ड्रग्स और अत्यधिक शराब पीने के कारण बीमार जान की तबीयत और ज्यादा खराब हुई होगी। चर्चा यह भी रही कि जान को डॉक्टरों ने कह दिया था कि वह ज्यादा दिन तक जी नहीं पाएंगे, इस वजह से वो मोक्ष पाने के लिए काशी आए थे।
विदेशी नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मणिकर्णिका घाट पर काशी गेस्ट हाउस
- फोटो : अमर उजाला
काशी गेस्ट हाउस में जान और कैथरीन के ठहरने की तिथि 18 सितंबर दर्ज है। मगर, संचालक पुल्लू साव ने पुलिस को जो सूचना दी उसमें ठहरने की तिथि 21 सितंबर लिखी है। इसे लेकर असमंजस की स्थिति रही। पुलिस के अनुसार पुल्लू ने जल्दबाजी में तिथि गलत लिख दी है।
वहीं, इस प्रकरण के बाद एक बार फिर विदेशी नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था और ठहरने के सुरक्षित स्थान को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। गंगा घाटों किनारे नियम और कानून को धता देकर जगह-जगह संचालित हो रहे लाज और पेइंग गेस्ट हाउस विदेशियों को ठहराते तो जरूर हैं, लेकिन स्वच्छता, साफ सफाई जैसे मानकों का ख्याल नहीं रखते हैं। इस संबंध में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट और पुलिस के साथ ही जिला प्रशासन भी पूरी तरह से उदासीन बना रहता है।