10 माह और 900 नए एचआईवी संक्रमित। आंकड़ा चिंताजनक है। पॉजिटिव होने की सबसे बड़ी वजह एक ही सिरिंज से ड्रग्स लेना हो सकती है, इसके अलावा असुरक्षित यौन संबंध और एक ही सिरिंज से टैटू बनवाना भी हो सकता है। बीएचयू अस्पताल में जांच कराने वाले 728 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, इनमें 150 से ज्यादा वाराणसी के हैं।
इस साल दस महीने (जनवरी से अक्तूबर तक) में ही करीब 900 नए एचआईवी संक्रमित मिले हैं। इनमें आधे से ज्यादा किशोर और युवा हैं। उम्र 15 से 45 साल के बीच है। सर्वाधिक 728 लोगों में संक्रमण की पुष्टि बीएचयू अस्पताल में जांच के बाद हुई है। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में जांच करवाने वाले 175 लोगों की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। शहरी इलाकों में रहने वाले ज्यादा संक्रमित हुए हैं।
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संक्रमण की जो वजह सामने आई है उनमें एक ही सिरिंज से ड्रग्स लेना, असुरक्षित यौन संबंध, गलत इंजेक्शन से टैटू बनवाना शामिल है। सरकारी हो या निजी अस्पताल हर छोटी से बड़ी सर्जरी करवाने से पहले डॉक्टर एचआईवी की जांच करवाते हैं।
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सरकारी अस्पतालों में रोजाना करीब 120 लोगों की एचआईवी, हेपेटाइटिस की जांच निशुल्क होती है। जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में औसतन 60 लोग जांच कराते हैं। बीएचयू अस्पताल में भी जांच होती है। अगर किसी मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आती भी है तो उसके प्रोटोकॉल के अनुसार आगे का इलाज किया जाता है। नियमित दवा दी जाती है। जांच की रूटीन व्यवस्था होती है। एक टीम काउंसिलिंग करती है।
एक ही सिरिंज से लिया नशीला ड्रग्स, 30 पॉजिटिव, दो की मौत
जिला अस्पताल स्थित ओएसटी सेंटर पर पिछले दो साल में 30 ऐसे लोगों में एचआईवी की पुष्टि हुई है जिन्होंने एक ही सिरिंज से नशीला ड्रग्स लिया था। इनमें से दो महिलाओं की अब तक मौत हो चुकी है। बाकी लोगों को एक निर्धारित समय पर सेंटर पर बुलाकर काउंसिलिंग के साथ ही दवा दी जा रही है।
सेंटर के काउंसलर प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि एचआईवी पॉजिटिव जो मामले आते हैं उनमें सिरिंज से ड्रग्स लेने वाले करीब 35 फीसदी मामले देखने को मिलते हैं।
बीएचयू में काशी के 150 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई
जनवरी से सितंबर तक बीएचयू अस्पताल में जांच करवाने के बाद जिन 728 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें करीब 150 लोग वाराणसी के हैं। बाकी पूर्वांचल(जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, चंदौली, सोनभद्र, भदोही आदि वाराणसी के आसपास के जिलों) बिहार आदि जगहों के 550 से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। 550 में से 200 से लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 17 से 50 साल के बीच है।
जांच के जो सेंटर हैं वहां नियमित निशुल्क जांच कराई जाती है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट हर महीने तैयार कराई जाती है। संक्रमित लोगों की काउंसिलिंग की जाती है। -डॉ. पीयूष कुमार राय, जिला क्षय रोग अधिकारी
जिला अस्पताल में एआरटी सेंटर पर जांच कराई जाती है। दस महीने में जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है उनकी नियमित काउंसिलिंग की जा रही है। जरूरत के हिसाब से दवाइयां दिलवाई जा रही हैं। किशोर और युवाओं की विशेष काउंसिलिंग की जाती है। इसमें उनको टैटू न बनवाने, ड्रग्स न लेने सहित अन्य बचाव के उपाय बताए जाते हैं। -डॉ. प्रेम प्रकाश, एमएस जिला अस्पताल