एसीपी कैंट अपूर्व पांडेय ने बताया कि गिरोह पहले समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करवाता था। विज्ञापनों में विवाह योग्य युवक-युवतियों के भ्रामक विवरण होते थे। लोग विज्ञापन देखकर नंबरों पर संपर्क करते थे। आजीवन सदस्यता और पंजीकरण के नाम पर रकम ऐंठते थे। पैसे मिलने के बाद ठग पीड़ितों का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देती थीं।
दो पीड़िताओं की शिकायत पर गिरोह का राज उजागर
एक महिला शिकायतकर्ता से चार किस्तों में 7000 रुपये और एक अन्य शिकायतकर्ता से 3500 रुपये सदस्यता शुल्क के नाम पर जमा कराए गए। रकम मिलने के बाद न तो किसी योग्य युवक-युवती का वास्तविक संपर्क उपलब्ध कराया गया और न ही सदस्यता शुल्क वापस किया गया। जांच में पता चला कि फर्जी कारोबार संचालित किया जा रहा था। मैरिज ब्यूरो में काम करने वाली युवतियों को दिन भर में 20 कॉल का टारगेट दिया जाता था। वसूली गई रकम के आधार पर युवती को कमीशन दिया जाता था।