नेपाल से बनारस लाई गईं युवतियों और महिलाओं की उम्र के अनुसार उन्हें अलग-अलग काम में लगाया जाता था। युवतियों का रूप-रंग देखकर उनसे जबरन देह व्यापार कराया जाता था। वहीं, कुछ महिलाओं को घरेलू कामकाज में लगाया जाता था।
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इसके साथ ही एजेंट और उनके लोग घरों में काम करने वाली नेपाली महिलाओं की गतिविधियों पर नजर रखते थे और धमकाते थे कि अगर कहीं मुंह खोला तो चोरी जैसे आरोपों में फंसा कर जेल भिजवा देंगे।
नेपाल से लाई गईं सारी महिलाएं बर्दिया (मधुवन) की रहने वाली हैं। वह दलालों के माध्यम से भारत पहुंची हैं। यहां लाने के बाद उन्हें एक अज्ञात मकान में बंधक बना लिया गया।
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि नेपाली युवतियों और महिलाओं को रोजगार दिलाने का झांसा संदीप और सुंदरी देते थे। दोनों नेपाली भाषा में ही युवतियों और महिलाओं से बातचीत कर उन्हें रोजगार दिलाने का वादा कर नेपाल से सोनौली लाते थे। इसके बाद सोनौली से बस से बनारस लाते थे।
रोजगार दिलाने के नाम पर 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये एडवांस लिया जाता था। इसके बाद शहर आने पर उनके नाम और पते से संबंधित कागजात छीन लिया जाता था। देह व्यापार से इंकार करने पर नेपाली युवतियों और महिलाओं के साथ मारपीट भी की जाती थी।
साथ ही, सभी की निगरानी के लिए हट्टेकट्टे बाउंसर रखे गए थे। हालांकि, कितनी युवतियां और महिलाएं नेपाल से बनारस लाई गईं और वो फिलहाल कहां हैं, इसका खुलासा तभी होगा जब सुंदरी और संदीप गिरफ्तार होंगे।