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वाराणसी: अश्विन महीने की अमावस्या छह अक्तूबर को, इस दिन श्राद्ध और दान से तृप्त होते हैं पितर

Tue, 05 Oct 2021 10:32 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पितृपक्ष। - फोटो : अमर उजाला
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पितरों का महापर्व अश्विन मास की अमावस्या छह अक्तूबर को मनाया जाएगा। सर्वपितृ अमावस्या पर पानी में तिल मिलाकर नहाने और पीपल में कच्चा दूध चढ़ाने से पितर प्रसन्न होते हैं। इस दिन श्राद्ध, तर्पण, पूजा-पाठ और दान की परंपरा है।

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ग्रंथों के मुताबिक, इस तिथि को पितृ दोष निवारण के लिए पूजा की जाती है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार हिंदू कैलेंडर की गणना में अमावस्या तीसवीं तिथि होती है। यानी कृष्णपक्ष का आखिरी दिन अमावस्या कहलाता है।

इस तिथि पर सूर्य और चंद्रमा का अंतर शून्य हो जाता है। इन दो ग्रहों की विशेष स्थिति से इस तिथि पर पितरों के लिए की गई पूजा और दान का विशेष महत्व होता है। वहीं, तर्पण अन्य चीजें संभव न हो तो इस तिथि पर पितरों की तृप्ति के लिए व्रत रखने का संकल्प लेना चाहिए और अन्न एवं जल का दान करना चाहिए। ब्राह्मण भोजन के साथ गाय को चारा खिलाया जाता है। इस दिन खीर और अन्य खाने की चीजों का दान भी दिया जाता है।

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अश्विन अमावस्या पर पितृ तृप्ति के लिए कर्म-

घर पर ही पानी में तिल डालकर नहाएं।
चावल बनाकर पितरों को धूप दें।
सुबह पीपल के पेड़ पर जल और कच्चा दूध चढ़ाएं।
पितरों की तृप्ति के लिए संकल्प लेकर अन्न और जल का दान करें।
ब्राह्मण भोजन करवाएं या किसी मंदिर में 1 व्यक्ति के जितना भोजन दान करें।
भोजन में सबसे पहले गाय फिर कुत्ते और फिर कौवे और इसके बाद चीटियों के लिए हिस्सा निकालें।
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