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Varanasi News: ब्रह्महत्या से मुक्ति के लिए भगवान राम ने की थी अपने आराध्य की नगरी की यात्रा, जानें मान्यता

Sun, 19 Oct 2025 06:12 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

आनंदकानन काशी से भगवान राम का गहरा रिश्ता है। उन्होंने यहां अपने गुरु वशिष्ठ के आदेश पर ब्रह्महत्या से मुक्ति के लिए काशी के सर्वश्रेष्ठ अविमुक्त क्षेत्र की यात्रा की थी।
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भगवान राम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भगवान शिव की नगरी काशी में शैव और वैष्णव परंपराएं साथ-साथ प्रवाहमान हैं। विश्व के प्राचीनतम शहर बनारस में त्रेतायुग के निशान आज भी विद्यमान हैं। पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग और गंगा के तट पर भगवान के राम से बना घाट आज भी श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं।

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काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार भगवान राम ने अपने गुरु वशिष्ठ के आदेश पर ब्रह्महत्या से मुक्ति के लिए काशी के सर्वश्रेष्ठ अविमुक्त क्षेत्र की यात्रा की थी। पंचक्रोशी के परिक्रमा पथ पर भगवान राम के आगमन के निशान हैं। 

धर्मकूप पर भगवान राम द्वारा स्थापित रघुनाथेश्वर शिवलिंग और रामेश्वर में रामेश्वर महादेव हर व हरि के एकाकार होने का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने बताया कि आनंद रामायण के यात्रा कांड के 35वें और 36 वें श्लोक में भगवान राम से पहले बजरंगबली हनुमान के काशी आने का वर्णन मिलता है। 

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ये है मान्यता

मान्यता है कि हनुमानजी ने भी काशी में घाट का निर्माण कराया था जिसे हनुमान घाट के नाम से जाना जाता है। आनंद रामायण के 37वें और 38वें श्लोक में भगवान राम के कार्तिक मास में काशी यात्रा का वर्णन है। प्रभु श्रीराम ने यात्रा के दौरान पत्थरों से एक घाट का निर्माण कराया था जिसे आज रामघाट के नाम से जाना जाता है।

भगवान राम ने काशी में रघुनाथेश्वर शिवलिंग और रामेश्वर में रामेश्वर महादेव की स्थापना की थी। भगवान रामेश्वर के दक्षिण में लंका क्षेत्र है और उत्तर में भगवान रघुनाथेश्वर हैं। उसके उत्तर पूर्व रामघाट भगवान रामेश्वर तक भगवान राम के पूर्वजों द्वारा शिवलिंग और बाली, सुग्रीव, हनुमान जी और गुरु वशिष्ठ जी द्वारा स्थापित शिवलिंग है। रघुनाथ द्वारा स्थापित रघुनाथेश्वर लिंग के स्पर्श करने से ब्रह्मघाती मनुष्य भी तुरंत ही शुद्ध हो जाता है।
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