अप्रैल में 314 तो मई में 514 कोरोना के शव निगम ने जलवाए
नगर निगम की ओर से हरिश्चंद्र घाट और सामनेघाट पर कोरोना के शवों को जलाने की व्यवस्था निशुल्क की गई है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल महीने में 353 कोरोना के शव को जलाया गया था। जबकि मई महीने में अब तक 514 शव को जलाया गया है। शुरुआती दिनों में हरिश्चंद्र घाट पर स्थित गैस शवदाह गृह की मशीनों में शव को जलाया जा रहा था। लेकिन जब शवों की संख्या बढ़ी तो लकड़ियों पर भी शव को जलाया गया।
अस्पताल के मृतकों का ब्योरा ऑनलाइन
कोविड या नॉन कोविड, जिन मरीजों की मृत्यु अस्पताल में भर्ती होने के दौरान हुई है, उनका मृत्यु प्रमाणपत्र का ब्योरा दर्ज करना अस्पताल की जिम्मेदारी है। अस्पतालों के मृतकों का मृत्यु प्रमाणपत्र 15 दिन के बाद वेबसाइट पर अपलोड हो रहा है, जबकि जिन लोगों की मृत्यु घर पर हुई है। उनका मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नगर निगम के रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कार्यालय में आवेदन करना होगा। नगर आयुक्त गौरांग राठी के अनुसार लोग ऑन लाइन भी आवेदन कर सकते हैं। मृत्यु प्रमाण पत्रों को 15 दिन के अंदर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
आवेदन के लिए ये कागजात जरूरी
मृत्यु के 21 दिन के भीतर आवेदन करने पर प्रमाण पत्र निशुल्क बनता है। इसके बाद आवेदन करने पर 20 का शुल्क लगता है। अगर घर पर किसी की मृत्यु हुई है तो मृत्यु प्रमाणपत्र के आवेदन के साथ दाह संस्कार की रसीद, मृतक का आधार कार्ड, एड्रेस प्रूफ, 2 पड़ोसियों के आधार कार्ड जमा कर सकते हैं। नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर द्वारा जांच के बाद प्रमाणपत्र बन जाएगा। इसका शुल्क केवल 20 रुपये है। हालांकि यह आवेदन एक माह के अंदर होना चाहिए। इससे ज्यादा देरी पर पहले सीएमओ कार्यालय से और एक साल से ज्यादा देरी पर एडीएम कार्यालय से सत्यापन कराना पड़ता है।
कोरोना से हो रही मौतों के चलते संवेदनात्मक लगाव कम हुआ है। पहले जहां मौत की खबर सुनकर लोग चौंकते थे और आंखें नम होती थी। लेकिन एक के बाद एक मौतों की खबर सुनकर चेतना शून्य हो जा रहा है। इसका आने वाले दिनों में काफी असर पड़ेगा। व्यक्ति के भीतर नकारात्मक चीजें हावी होंगे होंगी।
प्रोफेसर रवि पांडे, समाजशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (आईएमए) डॉ अशोक राय ने बताया कि कोरोना का असर न केवल विश्व बल्कि भारत पर भी पड़ा है। सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक मौतें हुई हैं। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। इस समय स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की जरूरत है ताकि आपात स्थिति में निपटा जा सके।