1980 में काशी विश्वनाथ मंदिर से सोना चोरी होने के मामले में इन्हीं अड़ियों से आंदोलन की शुरुआत हुई। जिसमें वर्तमान चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र से सोना बरामद किया गया। यही वो समय था, जब काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र को सरकार ने अपने अधिग्रहण में ले लिया। ऐसी ही एक घटना 1883 हुई, जिसमें एक रिक्शा चालक मुन्नूलाल की हत्या का मामला उठा और इन चाय की अड़ियों से आंदोलन की शुरुआत हुई। जिसने प्रदेश भर को हिला कर रख दिया।
गोदौलिया चौराहे पर आंदोलन कर रहे पूर्व भाजपा विधायक श्यामदेव राय चौधरी पर प्रशासन ने लाठीचार्ज किया। जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गए। साथ ही लखनऊ में आंदोलन के दौरान एक पुलिस अधिकारी की भी मृत्यु हो गई। ऐसे ही इन चाय की अड़ियों से कई तूफानी आंदोलनों को खड़ा किया गया। जिसमें जय प्रकाश नारायण और बीपी सिंह का आंदोलन प्रमुख है। जिसमें इन्ही अड़ियों से नारा दिया गया राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है। दुर्भाग्य है कि एक सुलझी राजनीति और समाज के लिए कुछ कर गुजरने वाले लोगों की यह अड़ियां समाप्त होती जा रही हैं। आज के युवाओं में वह बात भी नहीं रह गई।