समारोह की दूसरी प्रस्तुति काशी के ही पंडित नीरज मिश्र एवं पंडित ध्रुवनाथ मिश्र के सितार की जुगलबंदी रही। उन्होंने सबसे पहले अलाप, जोड़, झाला के पश्चात राग रागेश्री में निबद्ध विलंबित तीन ताल एवं द्रुत तीन ताल में रचनाएं बजाईं। उसके बाद राग मिश्र खमाज में धुन सुनाकर सबको आनंदित कर दिया। उनके साथ तबले पर पंडित भोलानाथ मिश्रा रहे।
तीसरी प्रस्तुति ख्यात वायलिन वादक पंडित सुखदेव मिश्रा की रही। चौथी प्रस्तुति राकेश के बांसुरी वादन, पांचवी प्रस्तुति आद्या मुखर्जी के शास्त्रीय गायन एवं निशा की आखिरी प्रस्तुति पंडित अंशुमान महाराज के सरोद वादन की रही। इससे पहले सुबह पट खुलने के साथ ही मां का पंचामृत स्नान कराया गया, तत्पश्चात गुलाब, नीलकंठ एवं गजरा से मां का शृंगार किया गया। संपूर्ण मंदिर परिसर की भव्य सजावट की गई, कोलकाता से आए कारीगरों ने मंदिर को सजाया। श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया गया।