वाराणसी। क्यारियों में फूल खिले है, लेकिन फूल उत्पादकों और दुकानदारों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। गुलाब की रंगत फीकी है, बेला और चमेली की खूशबू भी गायब हो गई है। विवाह नाममात्र के हो रहे हैं। अन्य आयोजनों पर भी रोक है और मंदिरों के कपाट भी बंद हैं, जिससे फूलों का बाजार ठप है। ऐसे में केवल फूल उत्पादक ही नहीं, वह दुकानदार भी परेशान हैं जो फूल माला बेचकर आजीविका चलाते हैं। सिर्फ मंदिरों में नियमित रूप से होने वाले राग-भोग के लिए ही फूल पहुंच रहे हैं।
जिले के चिरईगांव, दीनापुर गांव की पगडंडियों से गुजरते ही फूलों की खूशबू से मन तरबतर हो जाता है। दीनापुर के फूल पूर्वांचल ही नहीं, बिहार से लेकर कोलकाता तक खुशबू बिखेरते हैं। यहां के 300 परिवार फूलों की खेती पर ही निर्भर हैं। तीन सौ एकड़ में खिले फूलों का नजारा भी अद्भुत होता है। यह गांव कभी पीले नारंगी गेंदे से पटा रहता है तो कभी सफेद बेले, कुंद व टेंगरी से।
दीनापुर के अनिल, सुनीता, त्रिलोकी का कहना है कि लॉकडाउन के कारण कारोबार पूरी तरह से ठप है। चिरईगांव के विनोद कुमार ने दस बिस्वा में गुलाब की खेती की थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण सब खेत में ही रह गया। उन्होंने गुलाब को तोड़कर पंखुडि़यां सुखाई हैं कि शायद उन्हीं से कुछ कमाई हो जाए। पहले गुलाब की पंखुडि़यां 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक जाती थीं, लेकिन अब बीस के भाव बिक जाएं तो बड़ी बात है। शिवपुर के इंद्रपुर गांव में भी गुलाब की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। इस गांव में घर-घर में फूलों की माला बनती है। यहां की माला बांसफाटक व मलदहिया की फूल मंडी में बिकती है, मगर इस समय धंधा चौपट है।