वाराणसी जिले में वरुणा नहीं के तटीय इलाकों में जलभराव से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। जिले के अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर हर दिन 500 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं।
वरुणा के तटीय इलाकों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। घरों के पास पानी जमा होने से डेंगू, मलेरिया के साथ ही पेट संबंधी बीमारी की समस्या बढ़ गई है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर हर दिन 500 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें कुछ लोग बुखार से ग्रसित तो कुछ लोगों को उल्टी, दस्त के साथ ही शरीर में दाने निकलने की समस्या हो रही है। ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी में ऐसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
विज्ञापन
नक्खीघाट, पुलकोहना, दीनदयालपुर के साथ ही आसपास के इलाकों में लोगों के घर के पास बाढ़ का पानी जमा है। पुलकोहना के कुछ घर तो ऐसे हैं, जहां से लोगों को घर से निकलते समय सड़क पर जमा पानी में निकलना पड़ रहा है। रविवार को यहां बच्चे, महिलाएं इसी जमा पानी से निकलते नजर आए। जैतपुरा के तालिमनगर, हिदायतनगर, दीनदयालपुर, शक्करतालाब, आदि क्षेत्रों में बारिश का पानी जगह-जगह जमा होने से लोग परेशान हैं।
जिस तरह से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे लोगों के घरों के अंदर भी पानी पहुंचने का खतरा बना है। लोग हाथ, पैर में खुजली से परेशान हैं तो कुछ लोग बुखार से परेशान हैं। जिला अस्पताल में फिजिशियन, बाल रोग सहित अन्य ओपीडी में संक्रामक बीमारियों के 150 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
मंडलीय अस्पताल में चर्म रोग विभाग, फिजिशियन, चेस्ट फिजिशियन, बाल रोग विभाग में भी वरुणा के तटीय इलाकों में रहने वाले 100 लोग इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। रामनगर शास्त्री अस्पताल के साथ ही शहरी, ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर भी नदी किनारे रहने वाले लोग संक्रामक बीमारी से ग्रसित होने से परेशान हैं।
मंडलीय अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में डायरिया ग्रसित बच्चों की संख्या अधिक
मंडलीय अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि अस्पताल में 30 बेड का चिल्ड्रेन वार्ड बनाया गया है। इसमें 20 बेड के एक वार्ड में रविवार की देर शाम तक 15 बच्चे भर्ती थे। इसमें 10 से अधिक बच्चों में डायरिया की शिकायत पर भर्ती किया गया है। इसके अलावा अन्य वार्डों में भी भर्ती बच्चों में उल्टी, दस्त, पेट संबंधी अन्य समस्या वाले बच्चे हैं। इन बच्चों में जैतपुरा इलाके से भी दस साल से कम उम्र वाले बच्चों का इलाज किया जा रहा है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पीके सिंह का कहना है कि पानी घर के पास जमा होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा इससे बढ़ जाता है। हर दिन ओपीडी में नक्खीघाट, दीनदयालपुर सहित अन्य जगहों से जो मरीज आ रहे हैं। लोगों को पानी उबालकर पीने, घर के पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है।
बाढ़ चौकियों पर स्वास्थ्य टीम तैनात
सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी का कहना है कि जिले में गंगा, वरुणा के तटीय इलाकों सहित अन्य जगहों पर कुल 46 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इन जगहों पर डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ की टीम तैनात कर दी गई है। आम तौर पर बाढ़ के पानी जमा होने से सांप कांटने की घटनाएं बढ़ने का खतरा भी रहता है। इसको देखते हुए शहरी, ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम भी भिजवाया गया है।