शंकराचार्य की प्रेरणा से हुई थी शुरुआत
केंद्रीय देव दीपावली समिति के अध्यक्ष आचार्य वागीश दत्त मिश्र ने बताया कि दो दशकों से काशी की देव दीपावली ने महापर्व का स्वरूप ले लिया है। शंकराचार्य की प्रेरणा से प्रारंभ होने वाला यह दीपोत्सव पहले केवल पंचगंगा घाट की शोभा था। आगे चलकर काशी के सभी घाटों पर दीपों की शृंखला बढ़ती चली गई और 15 सालों में इसका स्वरूप आज भव्यतम हो चुका है।
अहिल्याबाई होल्कर ने स्थापित किया था हजारा दीप
पंचगंगा घाट का हजारा दीपस्तंभ देव दीपावली के दिन 1001 से अधिक दीपों की लौ से जगमगाता है। काशी की देव दीपावली प्राचीनता और परंपरा का अद्भुत संगम है। महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने पंचगंगा घाट पर पत्थरों से बना खूबसूरत हजारा दीपस्तंभ स्थापित किया था। यह हजारा दीप देव दीपावली की परंपरा का साक्षी है। काशी में देव दीपावली की शुरुआत भी यहीं से हुई थी।