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वाराणसी में कोरोना से जंग: गांवों में घर-घर लोग बीमार, न जांच करवा रहे न इलाज

Sat, 08 May 2021 05:12 PM IST
गीतार्जुन गौतम शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी

सार

गांवों के श्मशान में चिता पर चटकती लकड़ियां इस बात की गवाह है कि हर गांव से हर रोज लाशें उठ रही हैं। उसकी वजह कोरोना महामारी है। घर-घर लोग बीमार हैं, लेकिन न तो लोग जांच करा रहे हैं और ना ही सतर्क हैं। गांवों में कोरोना का माखौल उड़ाया जा रहा है, लेकिन मौत हर रोज हो रही है।
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कोरोना की जांच - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर यह आंकड़े झूठे हैं और दावा किताबी है। जनकवि अदम गोंडवी की यह पंक्तियां कोरोना महामारी में वाराणसी के गांवों पर सौ फीसदी लागू होती हैं। गांवों के श्मशान में चिता पर चटकती लकड़ियां इस बात की गवाह है कि हर गांव से हर रोज लाशें उठ रही हैं। उसकी वजह कोरोना महामारी है। घर-घर लोग बीमार हैं, लेकिन न तो लोग जांच करा रहे हैं और ना ही सतर्क हैं। गांवों में कोरोना का माखौल उड़ाया जा रहा है, लेकिन मौत हर रोज झपट्टा मार रही है।

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जिले में घर-घर लोगों में कोरोना के लक्षण हैं। मगर, न तो वह जांच की जहमत उठा रहे हैं और ना ही सतर्कता बरती जा रही है। कोई ऐसा गांव नहीं जहां बुखार, खांसी सहित अन्य लक्षण वाले लोग न हो। धौरहरा गांव की उपडाकपाल पूनम पांडेय, अतुल चौबे ठेकेदार, रामदुलार यादव, प्रेम शर्मा की पत्नी, पलकहां गांव के पूर्व प्रधान रामबली यादव जिन्होंने मतगणना के ही दिन बुखार के चलते दम तोड़ दिया था और वह परिणाम भी नहीं देख पाए। इसी तरह कुकुढहां गांव में डॉ. नंदलाल की भी बुखार के चलते मौत हो गई। बुखार का कहर ऐसा है कि कोई गांव ऐसा नहीं जहां मौतें नहीं हुई हो। बुजुर्गों का मरना तो आम बात हो गई है

इलाके के गौरा उपरवार, चंद्रावती, कैथी, सरसौल बलुआ, रामपुर घाटों पर शव जलाने के लिए लाइन लगी है। दाह संस्कार के लिए लकड़ियों की भी किल्लत हो रही है। बुखार खांसी के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित गांव धौरहरा व सुंगुलपुर है। यहां कम से कम 10 से 15 मौतें हुई हैं। हालांकि वायरल बुखार और खांसी तेज धूप व पंचायत चुनाव में भागदौड़ के कारण ही ज्यादातर गांवों में फैला। सरकार द्वारा इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरपतपुर व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धौरहरा है।

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सरकारी अस्पताल दूर होने से मुसीबत
गांवों से सरकारी अस्पतालों की दूरी इतनी है कि वहां जाने की बजाय लोग कस्बों में प्राइवेट चिकित्सकों से दवा ले रहे हैं। अजांव, बर्थरा खुर्द, चौबेपुर, भगतुआ, कुकुढंहां, शिवदशां, छित्तमपुर ऐसे कई गांव हैं जहां बुखार से पीड़ित मरीज न हो। गांवों में झोलाछाप ही इस समय लोगों के भगवान बने हैं। गलत उपचार के चलते अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। कादीपुर कलां गांव स्थित परमहंस चिकित्सालय के चिकित्सक डा. बीर बहादुर सिंह ने बताया कि बुखार खांसी का असर चौबेपुर इलाके में सुंगुलपुर व भंदहा में है।

गांवों में नहीं पहुंच रही स्वास्थ्य विभाग की टीम
गांवों में हो रही मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंच रही है। पचवार गांव में अब तक सात, खरगूपुर में चार, तिवारीपुर में दो, भटौली में दो, हाथी बाजार में चार, तेंदुई में चार, रामेश्वर में पांच, हरिभानपुर में पांच मौतों के बाद भी टीम नहीं पहुंची। न ही रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए। वहीं, आराजी लाइन विकासखंड के गहरपुर (खड़ौरा) के ग्रामीणों में दहशत है। पांच मौतों ने गांव को झकझोर दिया है। कई घरों में चूल्हे नहीं जल रहे हैं।
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मई में अब तक 15 की मौत
पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद ग्रामीण इलाकों में संक्रमण को रोकना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती है। मौतों का आंकड़ा भी कम नहीं हो रहा है। इसके पीछे कहीं न कहीं होम आइसोलेशन में रहने वालों की मॉनिटरिंग में लापरवाही वजह है। आंकड़ों पर गौर करे तो अप्रैल में 15 दिन में आठ ब्लॉकों में 200 से अधिक संक्रमित मिले। वहीं, 20 मौत ग्रामीण इलाकों में हुई। मई में अब काशी विद्यापीठ, सेवापुरी, पिंडरा, आराजी लाइन, चोलापुर में ही 100 से अधिक नए मरीज मिल चुके हैं। इन पांच दिनों में 15 मरीजों की कोरोना से मौत हुई है।

काशी विद्यापीठ ब्लॉक के गांवों में सबसे ज्यादा संक्रमित
विशेष अभियान चलाकर जांच के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन बहुत से लोगों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। काशी विद्यापीठ ब्लॉक में संक्रमित मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा पिंडरा, चितईपुर, चोलापुर, आराजीलाइन, सेवापुरी आदि ब्लॉक में भी संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

तीन दिन में 1673 की जांच, छह पॉजिटिव
पांच दिन के विशेष अभियान के तहत अब तक 3 दिन में 7,252 लोगों को कोविड मेडिसिन किट दी गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 2,04 201 घरों का भ्रमण भी किया है। 4022 लोगों में बुखार, 6359 लोगों में सर्दी, जुकाम और खांसी जबकि 351 लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई। इसके अलावा 188 लोगों में बुखार, 10,342 लोगों में बुखार के साथ स्वाद या गंध का पता नहीं चलना पाया गया। 1673 लोगों की कोरोना जांच में छह पॉजिटिव पाए गए हैं।
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