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तकनीक: अब यूनिक एसआईडी से भी सलाखों के पीछे पहुंचेंगे अपराधी, वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस का डिजिटल हथियार तैयार

Thu, 09 Jul 2026 04:40 PM IST
Pragati Chand ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस अब यूनिक एसआईडी से भी अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएगी। इसके लिए कमिश्नरेट पुलिस का डिजिटल हथियार तैयार किया गया है। 
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Varanasi Police - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कानून की नजरों से बचकर भागने वाले अपराधियों के दिन अब लद चुके हैं। कमिश्नरेट पुलिस अब सिर्फ लाठी और बंदूक के भरोसे नहीं, बल्कि यूनिक एसआईडी (साक्ष्य पहचान संख्या) के डिजिटल हथियार से भी अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने की तैयारी कर चुकी है। 

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पिछले छह महीने में कमिश्नरेट के थानों में दर्ज 93 प्रतिशत प्राथमिकी में डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा चुका है। यानी सबूतों से छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं बचेगी।अक्सर अपराधी अदालत में तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर बच निकलते थे, लेकिन अब वाराणसी कमिश्नरेट में दर्ज 5129 एफआईआर में 4776 को सीधे ‘’ई-साक्ष्य’’ के डिजिटल लॉकर में दर्ज किया जा चुका है। 

डिजिटल साक्ष्यों के मामले में गोमती जोन के थानों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है, जहां 97 प्रतिशत मामलों में यूनिक एसआईडी जेनरेट की गई है। लक्सा और महिला थाने में 100 प्रतिशत मामलों में यूनिक एसआईडी जेनरेट की गई है। ऐसे में कमिश्नरेट पुलिस का यह डिजिटल तंत्र शातिर अपराधियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वीवीआईपी मूवमेंट वाले वरुणा जोन में 2152 और काशी जोन में 2008 एफआईआर दर्ज हुईं। दोनों जोन में 92 प्रतिशत मामलों में डिजिटल साक्ष्य लिंक किए गए।

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लक्सा और महिला थाने का 100 प्रतिशत प्रदर्शन
काशी जोन में कुल 2008 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें से 1856 (92 प्रतिशत) मामलों में यूनिक एसआईडी जेनरेट की गई। सर्किल कोतवाली के तहत कोतवाली, आदमपुर, रामनगर और महिला थाना आते हैं। इस सर्किल में कुल 418 एफआईआर के सापेक्ष 397 (95 प्रतिशत) मामलों में यूनिक एसआईडी तैयार की गई। सर्किल दशाश्वमेध के तहत दशाश्वमेध, चौक और लक्सा थाने आते हैं। इस सर्किल में कुल 300 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें से 290 (97 प्रतिशत) मामलों में यूनिक एसआईडी जेनरेट की गई। लक्सा थाने का प्रदर्शन 100 प्रतिशत रहा। 

वरुणा जोन में लोहता थाने का आंकड़ा शून्य
वरुणा जोन में कुल 2152 एफआईआर के सापेक्ष 1980 (92 प्रतिशत) मामलों में यूनिक एसआईडी जेनरेट की गई, जबकि 172 मामले लंबित हैं। सर्किल कैंट के तहत कैंट, शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर थाने आते हैं। यहां कुल 699 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें से 671 (96 प्रतिशत) मामलों में यूनिक एसआईडी तैयार की गई। सर्किल सारनाथ में सारनाथ, चोलापुर और चौबेपुर थाने शामिल हैं। यहां कुल 861 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें से 760 (88 प्रतिशत) मामलों में यूनिक एसआईडी जेनरेट की गई।

गोमती जोन में ई-साक्ष्य के 29 मामले शेष
गोमती जोन का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। यहां कुल 969 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें से 940 (97 प्रतिशत) मामलों में यूनिक एसआईडी जेनरेट की गई, जबकि 29 मामले शेष हैं। सर्किल पिंडरा के तहत बड़ागांव, फूलपुर, सिंधौरा और पिंडरा थाने आते हैं। यहां कुल 506 एफआईआर के सापेक्ष 492 (97 प्रतिशत) मामलों में यूनिक एसआईडी तैयार की गई। सर्किल राजातालाब के तहत राजातालाब, मिर्जामुराद, कपसेठी और जंसा थाने शामिल हैं। यहां कुल 463 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें से 448 (97 प्रतिशत) मामलों में यूनिक एसआईडी जेनरेट की गई, जबकि 15 मामले शेष हैं।

जोनवार ई-साक्ष्य का ब्यौरा
जोन एफआईआर यूनिक एसआईडी शेष
गोमती 969 940 29
वरुणा 2152 1980 172
काशी 2008 1856 152
नोट : 1 जनवरी 2025 से 15 जून 2026 तक के आंकड़े।      
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साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म
नए कानूनी प्रावधानों के तहत अब किसी भी अपराध स्थल से बरामद होने वाले सबूतों, बयानों और कार्रवाई की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी कर उसे 'ई-साक्ष्य' पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसके बाद एक 'यूनिक एसआईडी' जेनरेट होती है, जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो जाती है और अदालत में मामला अधिक मजबूत बनता है। - मोहित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त
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