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विवेकानंद को आइकन नहीं, चरित्र के रूप में अपनाएं युवा

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वाराणसी। 15वीं शताब्दी में राजसत्ता ने धर्म परिवर्तन व संस्कृति त्यागने के लिए जबरन प्रयास किया तो तुलसीदास जैसे संत इसके विरूद्ध खड़े हुए और गली-गली में रामलीला का आयोजन किा। जेल में बंद बालगंगाधर तिलक ने गीता रहस्य नामक पुस्तक लिखी। आजादी के बाद राष्ट्र किधर जाए, इस पर राजसत्ता को चिंता ही नहीं हुई।
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उक्त बातें पर्यटन मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहीं। वह शुक्रवार को बीएचयू के शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में सेवाज्ञ संस्थानम की ओर से उतिष्ठ भारत की थीम पर वैश्विक संदर्भ में व्यक्ति निर्माण तथा भारतीय चिंतन विषयक एक दिवसीय विमर्श को संबोधित कर रहे थे।
मुख्य वक्ता मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज ने कहा कि समाज में बड़ी दुविधा है कि युवा विवेकानंद को आइकन की तरह लेते हैं, चरित्र की तरह नहीं। आप विवेकानंद के फॉलोअर तभी हो सकते हैं, जब उनके सामने खड़े होने पर आपका चरित्र दिखने लगे।
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विशिष्ट अतिथि पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि आज के युवाओं से आग्रह है कि अपने खेतों के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से में जैविक कृषि का प्रयोग करिए। इस अवसर पर सेवाज्ञ संस्था की वेबसाइट का लोकार्पण हुआ। संचालन तरूण प्रताप सिंह व शांभवी ने किया।
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