वाराणसी। काशी विद्यापीठ के शताब्दी समारोह को लेकर ललित कला विभाग की दीवारें व पेड़ों की टहनियां पर जनजाति कला, मधुबनी पेंटिंग हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। कहीं कपड़े के कतरन से तैयार गुड़िया तो कहीं कागज के कतरन, प्लास्टिक बॉटल व बेकार के सामानों से तैयार सुंदर हस्तशिल्प लेने के लिए ग्राहक उमड़ रहे हैं।
समारोह के तहत लगे हस्तशिल्प व कला मेले में ललित कला विभाग, जीवनदीप महाविद्यालय, गंगापुर कैंपस सहित अन्य महाविद्यालय के युवाओं का जोश और हुनर देखते बन रहा है। शुक्रवार को भी लोग अपना पोट्रेट बनवाने के लिए उतावले नजर आए। वहीं लोगों को जनजातीय को देखने का भी मौका मिला। यहां खान-पान के साथ खेल का आनंद भी लोगों ने लिया। अनुपयोगी वस्तुओं से बनी गांधी व शिवप्रसाद गुप्त की प्रतिमा को खूब सराहा गया। वहीं विद्यापीठ के पुरातन छात्रों का कटआउट के सामने लोगों ने सेल्फी ली। कला मेले में कुल 40 स्टॉलों पर 140 से ज्यादा कला दीर्घा में प्रदर्शित हैं।
कठपुतली नृत्य के जरिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश
शताब्दी समारोह के तहत ललित कला विभाग में सांध्यकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें कठपुतली नृत्य के जरिए कलाकारों ने बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ व बाल मजदूरी रोकने का संदेश दिया। संस्कार भारती और ललित कला विभाग की ओर से अभिनव कला मंच चलो प्रकाश की ओर से कलाकार राजेंद्र कुमार के नेतृत्व में सोमनाथ पटेल, महेंद्र कुमार, अमित पटेल, प्रिया राय, सपना, प्रदीप ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कठपुतली नृत्य के बाद नेहा व अदिति जायसवाल द्वारा अर्धनारीश्वर के स्वरूप में शिव तांडव की प्रस्तुति ने सभी को रोमांचित कर दिया। असम के बीहू नृत्य ने अखंड भारत का संदेश दिया। गीता पर आधारित श्रीधर शर्मा के नृत्य ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में आकाश यादव द्वारा गणेश वंदना, श्रेयसी द्वारा कथक, व प्रांजल द्वारा बांसुरी वादन को दर्शकों ने खूब सराहा। इस अवसर पर वेद प्रकाश मिश्रा, नीरज अग्रवाल, सुमित श्रीवास्तव, सविता यादव, डॉ.रामराज, आकाश सेठ, शत्रुधन प्रसाद, रजनीश कुमार पांडेय, अल्का अस्थाना, अर्पिता वीर चौरसिया आदि मौजूद रहे।