वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में समाज कार्य विभाग के संस्थापक पद्मविभूषण प्रो. राजाराम शास्त्री 16 साल की अवस्था में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए थे। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में निरंतर लगे रहने के कारण कठोर कारावास और दो बार नजर बंद भी रहे। उक्त विचार महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने व्यक्त किए। वह बृहस्पतिवार को समाज कार्य विभाग की ओर आयोजित प्रो. राजाराम शास्त्री की 116वीं जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि प्रो. शास्त्री ने स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात काशी विद्यापीठ में देश की नई आवश्यकताओं के अनुरूप एमए स्तर पर समाज विज्ञान वेता उपाधि हेतु पाठ्यक्रम एवं विभाग की संकल्पना की जो कि बाद में समाज कार्य विभाग बना। उन्होंने विभिन्न भारतीय दर्शनों के उपयोगी तत्वों को समाज कार्य शिक्षण में समन्वित किया जिससे आज भी काशी विद्यापीठ का समाज कार्य का पाठ्यक्रम उनके दार्शनिक विचारों से अनुप्राणित है। उन्होंने अनेक मानक कृतियों की रचना की जिनमें मन के भेद, स्वप्न दर्शन, समाज विज्ञान सिद्धांत एवं प्रयोग तथा समाज कार्य मुख्य हैं। उन्हें 1991 में पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रो. गिरीश शास्त्री ने कहा कि समाज कार्य विभाग की आत्मा में प्रो. राजाराम शास्त्री का वास है। संचालन विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. संजय ने किया। इस दौरान प्रो. रामप्रकाश द्विवेदी, प्रो. वंदना सिन्हा, प्रो. भावना वर्मा, डॉ. निमिषा गुप्ता, डॉ. शैला परवीन, डॉ. अनिल कुमार चौधरी आदि ने विचार व्यक्त किए।