सरैयां डॉटपुल के पास खुदाई से कज्जाकपुरा-आशापुर मार्ग के बंद होने के बाद यातायात महकमा कोई विकल्प नहीं ढूंढ पा रहा है कि अराजक हुए ट्रैफिक से निबटा कैसे जाए। जबकि, तीन साल पहले बनी कार्ययोजना अब भी अमल में ला दी जाए तो स्थिति काफी हद तक नियंत्रित हो जाएगी। लेकिन, प्रशासन के मुंह मोड़ लेने से यह समस्या और भी विकराल होती जा रही है।
ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए तीन साल पहले तत्कालीन एसएसपी अजय मिश्र ने यह कार्ययोजना तैयार की थी। इसके तहत गाजीपुर रूट का प्राइवेट बस स्टैंड चौकाघाट से हटाकर आशापुर किया जाना था।
इसके लिए आशापुर में आधा दर्जन से अधिक पेड़ काटकर जगह भी निर्धारित कर दी गई लेकिन इसी दौरान अजय मिश्र का तबादला होने से इसे अमल में नहीं लाया जा सका। जिस जगह बसें खड़ी होनी थीं, वहां कहीं ईंट-बालू की अवैध मंडी चल रही है तो कहीं पटरी दूकानदारों ने कब्जा जमा लिया है।
ये हालात तब हैं जब जिला प्रशासन से लेकर यातायात पुलिस और नगर निगम तक हर स्तर पर ट्रैफिक सुधार के लिए तत्परता बरतने के दावे किए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि गाजीपुर रूट की बसों का स्टैंड आशापुर में हो जाए तो कज्जाकपुरा-आशापुर मार्ग के बंद होने से जो ट्रैफिक की समस्या विकराल हुई है, उसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
कमजोर हो चुके सरैयां रेलवे डॉटपुल को सिर्फ दोपहिया के लिए वनवे किया गया था लेकिन बुधवार को वहां सीवर लाइन के लिए खुदाई के बाद वनवे तो छोड़िए, पैदल चलने की भी जगह नहीं बची है। इस रूट के ट्रैफिक का दबाव चौकाघाट से पुलिस लाइन चौराहा होते हुए आशापुर मार्ग पर है।
यातायात पुलिस भी मानती है कि इस रूट पर तकरीबन पांच लाख से अधिक छोटे-बड़े वाहनों का दबाव जाम की बड़ी वजह है। इससे आसपास के मार्गों पर भी यातायात प्रभावित हो रहा है और जाम की समस्या पहले से काफी बढ़ गई है।
स्थिति से निबटने में हाथ खड़े कर चुकी यातायात पुलिस भी आशापुर में गाजीपुर रूट की बसों के स्टैंड से राहत होने की बात कह रही है लेकिन इसके लिए अब तक प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है। आशापुर में पेड़ों को काटकर बस स्टैंड के लिए समतल की गई जमीन पर कहीं ईंट, गिट्टी, बालू की अवैध मंडियां सजी हैं तो कहीं दूकानदारों ने उस पर कब्जा जमा लिया है।