पिछले महीने 25 जून को भी डीएम एस राजलिंगम की अध्यक्षता में असि नदी से कब्जे हटाने के संबंध में बैठक हुई। उन्होंने विभागाें और अफसरों को निर्देश दिए कि असि नदी को कब्जा मुक्त कराया जाए मगर एक महीना बीतने के बाद भी उनके आदेश भी परवान नहीं चढ़ सके हैं। जिस तरह सिस्टम इसे आगे बढ़ा रहा है तो उसे देखते हुए नहीं लगता है कि असि नदी भविष्य में कभी भी अपने मूल रूप में लौट भी पाएगी। आठ किलोमीटर लंबी यह नदी चितईपुर, करौंदी, कर्माजीतपुर, नेवादा, सराय नंदन, नरिया, साकेत नगर, भदैनी और नगवा होते हुए गंगा में जाकर मिलती है।
नगर निगम को जारी नोटिस में कहा गया कि गंगा नदी में सीवर, घरेलू गंदा पानी और औद्योगिक कचरा नालों से गंगा नदी में गिराने की निगरानी ट्रिब्यूनल कर रहा है। इसके लिए कुछ लोकेशन एनजीटी ने तय कराई हैं। इसमें सामने घाट पर सनबीम स्कूल, रविदास पार्क नगवा, संकट मोचन नाला, सराय नंदन और टेंगरा मोड रामनगर शामिल है।
हर बार विरोध और वापस लौटती टीमें
असि नदी पर बड़े-बड़े मकान, कोठियां बन गई हैं। अस्पताल तैयार हो गए हैं, होटल बने हुए हैं। इनके मानचित्र भी पास नहीं है। जाहिर सी बात है कि जिम्मेदार विभागों की मिलीभगत के बिना तो यह संभव हुआ नहीं है। इसीलिए कार्रवाई में भी कहीं चाहरदीवारी गिरा देना कोई टिन शेड गिरा देना इस तरह की कार्रवाई के वीडियो और फोटो भेजकर विभाग भी कोरम पूरा कर लेते हैं। यहां प्रभावी कार्रवाई कभी नहीं हुई।
क्या बोले अधिकारी
लोकसभा चुनाव से पूर्व कार्रवाई शुरू की गई थी और आठ अवैध निर्माणों को ढहाया गया था। इसी बीच चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई तो कार्रवाई रुक गई थी। टीमें बना दी गईं हैं। जल्द ही असि नदी पर व्यापक अभियान चलाकर कब्जे हटाए जाएंगे। -दुष्यंत कुमार, अपर नगर आयुक्त