काशी की रूपवाणी संस्था अपने नाटक ‘राम की शक्तिपूजा’ का 50वां मंचन करने जा रही है। 31 अक्तूबर को होने वाले इस मंचन का साक्षी बनेगा नई दिल्ली का कमानी ऑडिटोरियम।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की ओर से आयोजित इंटरनेशनल रामायण फेस्टिवल में ये नाटक भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। इस महोत्सव में रामकथा पर आधारित अलग-अलग देशों की प्रस्तुतियों का भी प्रदर्शन होगा।
हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता पर आधारित इस नाटक का मंचन फरवरी, 2013 से हो रहा है। अब तक देश के कई प्रमुख अवसरों, समारोहों और कलाकेंद्रों में इसका मंचन किया जा चुका है। नाटक के मुख्य पात्रों की भूमिका लड़कियां ही निभाती हैं।
हाल ही में इस प्रस्तुति के लिए इस नाटक के निर्देशक व्योमेश शुक्ल को थिएटर डायरेक्शन के लिए संगीत नाटक अकादमी का उस्ताद बिस्मिल्ला खां युवा पुरस्कार भी मिल चुका है।
‘राम की शक्तिपूजा’ के साथ-साथ रूपवाणी चित्रकूट, कामायनी, रश्मिरथी, पंचरात्रम और शेक्सपियर के मशहूर नाटक मैकबेथ के हिंदी रूपांतरण का मंचन कर चुकी है।