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देव दीपावली पर बनारस की वायु गुणवत्ता प्रदेश के दूसरे शहरों के मुकाबले बेहतर, एक्यूआई रहा इतना

Tue, 01 Dec 2020 11:55 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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देव दीपावली पर बनारस की वायु गुणवत्ता प्रदेश के दूसरे शहरों के मुकाबले बेहतर रही। शहर के कई इलाकों में देर रात हुई आतिशबाजी के बाद भी बनारस की वायु गुणवत्ता 260 ही रही। पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा में भी कमी दर्ज की गई।

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार तीन दिन पहले प्रदेश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर बनारस की वायु गुणवत्ता अब सुधरने लगी है। देव दीपावली के बाद लिए गए आंकड़ों के अनुसार वायु गुणवत्ता की स्थिति प्रदेश में हापुड़ के बाद सबसे बेहतर रही। देव दीपावली के दिन शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 271 रहा, जबकि अन्य सभी शहरों में यह 300 के पार चला गया था।

हापुड़ का एक्यूआई सबसे कम 170 दर्ज किया गया। वहीं मंगलवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 383 और न्यूनतम मात्रा 97 रही। पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 388 और न्यूनतम मात्रा 129 रही।  
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण के कारण सारे निर्माण कार्य स्थगित कर दिए गए थे और पानी का छिड़काव दिन-रात चलता रहा, जिससे धूल व मिट्टी के कण नहीं उड़े। इस बीच गंगा का जल थोड़ा प्रदूषित हुआ है, जिसकी जांच के बाद तस्वीर स्पष्ट होगी।
 

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वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
  • गाजियाबाद -400
  • लखनऊ- 305
  • कानपुर- 353
  • ग्रेटर नोएडा- 362
  • मुजफ्फरनगर-362

प्रदूषण रोकने के लिए सख्त निर्देश
प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव ने उच्चस्तर पर बैठक करके अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जिले में प्रदूषण रोकने के लिए सभी जरूरी उपाय किए जाएं। पराली जलाने वालों पर कठोर कार्रवाई की रणनीति बनी। साथ ही नियमित निगरानी के लिए राजस्व, पुलिस व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को शामिल करके एक टीम बनाई गई है।

 
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वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
गंगाजल की गुणवत्ता अत्यंत खराब
प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार गंगा में प्रदूषण थम नहीं रहा है। बीते दो वर्षों के अंतराल में 30 मॉनीटरिंग स्थलों में से 28 में प्रदूषण की स्थिति खराब हुई है। गंगा की जल धारा में मलजनित व अन्य जीवाणुओं की भरमार है। 13 जगहों पर बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड मानक सीमा से अधिक पाया गया।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंगा के प्रदूषण पर नजर रखने के लिए बिजनौर से गाजीपुर तक 30 मॉनिटरिंग स्थल स्थापित किए गए हैं। वाराणसी में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा तो बढ़ी है और जीवाणुओं की संख्या में तुलनात्मक कमी तो आई है लेकिन गुणवत्ता डी श्रेणी यानी अत्यंत खराब स्थिति में है।
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