चावल की गुणवत्ता हो चुकी है प्रमाणित
ब्लैक राइस में औषधीय गुण मौजूद है। इसकी पुष्टि इंडियन राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद, फूड टेक्नॉलाजी प्रयागराज और इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट बीएचयू ने जांच के बाद की है। चावल में एंथ्रोसाइनिंग, फाइबर, विटामिन-ई, जिंक व आयरन की भरपूर मात्रा है। इसके अलावा पौष्टिक गुण होने का भी दावा है।
जिले का ब्रांड बनने के करीब
ब्लैक राइस को कलेक्टिव मार्क मिल चुका है। यह उपलब्धि जिला प्रशासन और कृषि विभाग की संयुक्त पहल से मिली है। कलेक्टिव मार्क मिलने से काले चावल को चंदौली जिले के एक विशेष उत्पाद के रूप में मान्यता प्राप्त हो चुकी है। इससे उत्पाद की ब्रांडिंग और मार्केटिंग में आने वाली दिक्कतें भी खत्म हो गई हैं।
पिछले वर्ष ब्लैक साइस की खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज के बदले 85 रुपये प्रति कुंतल की दर से भुगतान किया गया था। खरीदे गए धान को कुटाई कराने के बाद छह सौ कुंतल संबंधित फर्म की ओर से आस्ट्रेलिया निर्यात किया गया था। आगे भी किसान ब्लैक राइस की खेती करने में रुचि ले रहे हैं। ऐसे में उत्पाद को विश्वस्तर पर पहुंचाने में प्रशासन जुटा हुआ है।
राजीव कुमार भारती, उप कृषि निदेशक।