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परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपा सिंधु उर लाए

Thu, 13 Oct 2016 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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नाटी इमली का ऐतिहासिक मैदान बुधवार को कुछ देर के लिए अयोध्या में तब्दील हो गया। त्रेता युग में लंका विजय के बाद लौटे प्रभु श्रीराम को आंखों में बसाने के लिए जैसे कभी अवधपुरी के वासी हर्षित हो निकले थे, उसी तरह काशी भी रामभक्ति में डूबी नजर आई। हाथियों के काफिले के साथ काशिराज डॉ. अनंत नारायण सिंह ने सोने की गिन्नी भेंट कर राम के पुष्पक विमान की परिक्रमा की तो नाटी इमली जाने वाली सड़कों पर भाव भरे भक्तों का लय बद्ध रेला देखते बना। अस्ताचलगामी सूर्य की दमकती आभा उन क्षणों में तब और निखर गई जब लाखों के सैलाब के बीच भूमि पर साष्टांग पड़े भरत, शत्रुघ्न को राम-लक्ष्मण ने उठाकर गले लगाया। हर हर महादेव के गगनभेदी जयघोष के बीच फूलों की वर्षा से मैदान पट गया। भरत मिलाप काशी के लक्खा मेलों में से एक है।
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परे भूमि नहिं उठत उठाए/ बर करि कृपासिंधु उर लाए / स्यामल गात रोम भए ठाढ़े/ नव राजीव नयन जल बाढ़े/ भरतानुज लक्षिमन पुनि भेंटे/ दुसह बिरह संभव दुख मेटे/ छन महिं सबहिं मिले भगवाना/ उमा मरम यह काहु न जाना...। नाटी इमली के मंच पर राम की प्रतीक्षा में भरत-लक्ष्मण के साष्टांग पड़ते ही डमरू नाद और बैंडबाजे के साथ हर हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। एक तरफ हाथी पर सवार काशिराज डॉ. अनंत नारायण सिंह और दूसरी ओर छतों, बारजों, मंदिरों से लेकर पूरे मैदान में खचाखच उमड़ा पुरुषों, महिलाओं, बच्चों का सैलाब उन क्षणों को निहारने के लिए आतुर। पुष्पक विमान से उतरकर राम, लक्ष्मण दौड़ते हुए पहुंचे लेकिन प्रेमवश भरत उठाए नहीं उठते। राम ने उन्हें उठाकर सीने से लगा लिया। चारों भाई जब गले मिले तब भीड़ में तमाम आंखें उन भावों को निहारकर डबडबा गईं।


बुधवार को दोपहर बाद 3:40 बजे चित्रकूट से राम,सीता, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, जामवंत पुष्पक विमान पर सवार होकर नाटी इमली पहुंचे। हनुमान ने अयोध्या पहुंच कर भरत को भगवान राम के आने की खुशखबरी दी। अयोध्या से बैंडबाजे के साथ भरत, शत्रुघ्न 4:01 बजे लीला स्थल पर पहुंचे और जयकारे गूंजने लगे। कुछ देर में ही काशिराज अनंत नारायण सिंह की शाही सवारी आई। आगे आगे घुड़सवार और उनके पीछे तीन हाथियों के साथ काशिराज के आते ही भीड़ हर हर महादेव के जयकारे लगाने लगी। काशिराज ने हाथी से पुष्पक विमान की परिक्रमा की। भगवान के विमान पर उन्होंने सोने की गिन्नी भेंट की। इसके बाद रामायणियों की मंडली के बीच से उत्तर कांड के भरत मिलाप के प्रसंग की चौपाइयों के सस्वर बोल गूंजने लगे। कुछ ही क्षणों में राम-लक्ष्मण पुष्पक विमान से उतरकर दौड़े और चारों भाइयों के प्रेम मिलन की बेला यादगार बन गई।
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इन दृश्यों को आंखों में संजोने के लिए हर कोई आतुर था। मिलन के बाद पारंपरिक वेश में यादव बंधुओं का कारवां देखते बन रहा था। चारो भाइयों के कंधे पर लेकर दौड़ते हुए पुष्पक विमान पर पहुंचाया गया। वहां आरती उतारी गई। इसके बाद लाल साफा, गंजी और धोती में यादव बंधु भगवान का पुष्पक विमान कंधे पर उठाकर नाटी इमली से अयोध्या पहुंचे।
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