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Zakir Hussain : 2008 में उस्ताद के तबले ने किया था काशी में शंखनाद, दोबारा आने की जताई थी इच्छा; रह गई अधूरी

Tue, 17 Dec 2024 03:24 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News : उस्ताद जाकिर हुसैन का काशी के साहित्य घराने से गहरा लगाव था। वे महाशिवरात्रि महोत्सव में आए थे। उनके तबले की थाप सुनते ही काशीवासी मंत्रमुग्ध हो गए। वहीं यहां के लोगों से मिले सम्मान के बाद उन्होंने यहां दोबारा आने की इच्छा जताई थी।
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काशी में प्रस्तुति के दाैरान तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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2008 के महाशिवरात्रि महोत्सव में उस्ताद जाकिर हुसैन ने अंतिम बार काशी में अपनी प्रस्तुति दी। हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय का पूरा प्रांगण दर्शकों से खचाखच भरा था। नीचे के हाॅल तो छोड़िए छत के ऊपर की बालकनी पर भी संगीत प्रेमी तबले की थाप सुनने के लिए बेकरार बैठे थे। उस्ताद जाकिर हुसैन ने जब तबला बजाना शुरू किया तो फिर पूछिए मत। यूं ही नहीं उनका उस्ताद कहा जाता है।

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यह कहना है महाशिवरात्रि महोत्सव के आयोजक किशन जालान का। महाशिवरात्रि महोत्सव में उस्ताद की प्रस्तुति को याद करते हुए किशन जालान ने बताया कि कार्यक्रम में जैसे-जैसे तबला वादन परवान चढ़ता गया, दर्शकों का उत्साह भी बढ़ता गया। 

उस्ताद ने जब तबले पर शंखनाद करना शुरू किया तो काशी की जनता भी हतप्रभ रह गई। पूरा प्रांगण हर-हर महादेव के जयकारे से गूंज उठा। रात ढल रही थी लेकिन श्रोताओं की संगीत की प्यास बुझने का नाम नहीं ले रही थी। मंच के सामने बैठे श्रोता उनसे कुछ और सुनने की मांग करने लगे। इसके बाद तबले पर जब उन्होंने डमरू निनाद किया तो फिर क्या था, श्रोता तो उस्ताद के मुरीद हो उठे। 
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इसके बाद महाशिवरात्रि महोत्सव में कई कलाकार आए लेकिन उतनी ज्यादा भीड़ और दीवानगी देखने को नहीं मिली। किशन जालान ने बताया कि पिछले साल उस्ताद से मुलाकात हुई थी तो उन्होंने दोबारा महाशिवरात्रि महोत्सव में आने की इच्छा जताई थी, लेकिन नियति को यह मंजूर नहीं था। उनकी काशी आने की इच्छा अधूरी रह गई।

काशी आगमन के दाैरान जाकिर हुसैन। - फोटो : अमर उजाला
तुलसीघाट पर बजा था जाकिर का तबला
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि श्री संकटमोचन फाउंडेशन की ओर से 1993 में आयोजित ध्रुपद महोत्सव में तुलसीघाट पर उस्ताद जाकिर हुसैन ने तबला बजाया था। उन्होंने अपने पिता उस्ताद अल्ला रक्खा साहब के साथ कार्यक्रम प्रस्तुत किया था। उनके साथ सारंगी पर उस्ताद सुल्तान खां थे। 

इसके अलावा 1965 से 1975 के बीच कई कार्यक्रमों में वे काशी आए। 2018 में संकटमोचन संगीत समारोह के 97वें संस्करण में प्रस्तुति देने के लिए उस्ताद जाकिर हुसैन ने इच्छा जताई थी लेकिन कुछ कारणों से यह संभव नहीं हो सका था। पिछले साल उनसे बात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि 2025 में संकटमोचन संगीत समारोह में प्रस्तुति देने जरूर आऊंगा लेकिन इस तरह से उनका अचानक चले जाना बेहद दुखद है। वह ऐसे कलाकार थे जिनके नाम से तबला जाना जाता था।
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भारत रत्न पं. रविशंकर के साथ की थी संगत
गायक डॉ. प्रीतेश आचार्य ने बताया कि 1981 में रिम्पा की ओर से आयोजित संगीत समारोह की स्मृतियां आज तक जेहन में ताजा हैं। भारत रत्न पं. रविशंकर, उस्ताद अल्लारखां और उस्ताद जाकिर हुसैन की प्रस्तुति को हर किसी ने सराहा था। कार्यक्रम स्थल पर लोग शांति से एकाग्र होकर अनूठे वादन त्रयी को सुन रहे थे।

मीरघाट पर उस्ताद को दी श्रद्धांजलि
मीरघाट स्थित बाबा द स्कूल ऑफ म्यूजिक के संस्थापक तबला वादक पं. रवि त्रिपाठी ने तबले के उस्ताद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उस्ताद जाकिर हुसैन साहब के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान पं. किशन राम डोहकर, अशेष नारायण मिश्रा, संतोष मिश्रा एडवोकेट और स्नेहा चौधरी उपस्थित रहे।
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