काशी आगमन के दाैरान जाकिर हुसैन।
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तुलसीघाट पर बजा था जाकिर का तबला
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि श्री संकटमोचन फाउंडेशन की ओर से 1993 में आयोजित ध्रुपद महोत्सव में तुलसीघाट पर उस्ताद जाकिर हुसैन ने तबला बजाया था। उन्होंने अपने पिता उस्ताद अल्ला रक्खा साहब के साथ कार्यक्रम प्रस्तुत किया था। उनके साथ सारंगी पर उस्ताद सुल्तान खां थे।
इसके अलावा 1965 से 1975 के बीच कई कार्यक्रमों में वे काशी आए। 2018 में संकटमोचन संगीत समारोह के 97वें संस्करण में प्रस्तुति देने के लिए उस्ताद जाकिर हुसैन ने इच्छा जताई थी लेकिन कुछ कारणों से यह संभव नहीं हो सका था। पिछले साल उनसे बात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि 2025 में संकटमोचन संगीत समारोह में प्रस्तुति देने जरूर आऊंगा लेकिन इस तरह से उनका अचानक चले जाना बेहद दुखद है। वह ऐसे कलाकार थे जिनके नाम से तबला जाना जाता था।
भारत रत्न पं. रविशंकर के साथ की थी संगत
गायक डॉ. प्रीतेश आचार्य ने बताया कि 1981 में रिम्पा की ओर से आयोजित संगीत समारोह की स्मृतियां आज तक जेहन में ताजा हैं। भारत रत्न पं. रविशंकर, उस्ताद अल्लारखां और उस्ताद जाकिर हुसैन की प्रस्तुति को हर किसी ने सराहा था। कार्यक्रम स्थल पर लोग शांति से एकाग्र होकर अनूठे वादन त्रयी को सुन रहे थे।
मीरघाट पर उस्ताद को दी श्रद्धांजलि
मीरघाट स्थित बाबा द स्कूल ऑफ म्यूजिक के संस्थापक तबला वादक पं. रवि त्रिपाठी ने तबले के उस्ताद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उस्ताद जाकिर हुसैन साहब के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान पं. किशन राम डोहकर, अशेष नारायण मिश्रा, संतोष मिश्रा एडवोकेट और स्नेहा चौधरी उपस्थित रहे।