वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दर्शनशास्त्र विभाग में संगोष्ठी में वक्ताओं ने पर्यावरण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की। बतौर मुख्य वक्ता सीपेट के महानिदेशक प्रो. शिशिर सिन्हा ने कहा कि प्लास्टिक के उचित निस्तारण में तकनीक का प्रयोग करना होगा। विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. शिशिर सिन्हा ने कहा कि प्लास्टिक निस्तारण के लिए वैज्ञानिक नवाचार और पुनर्चक्रण तकनीकों को बढ़ावा देना सभी की जिम्मेदारी है।
पद्मश्री हरिहर कृपालु त्रिपाठी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व पर चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान के प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनाना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. नंदिनी सिंह ने किया, जबकि कार्यक्रम सचिव डॉ. अम्बरीष राय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। ब्यूरो