संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 111वीं रैंक हासिल करने वाली काशी की अरफा उस्मानी ने खास बातचीत में सफलता का राज बताया। उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने की जरूरत नहीं है। मेरा चयन चौथे प्रयास में हुआ है।
संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 111वीं रैंक हासिल करने वाली काशी की अरफा उस्मानी ने खास बातचीत में सफलता का राज बताया। उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने की जरूरत नहीं है। मेरा चयन चौथे प्रयास में हुआ है।
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यूपीएससी में 111वीं रैंक हासिल करने वाली अरफा उस्मानी की सफलता का राज सोशल मीडिया से दूरी है। वह कहती हैं, चार साल तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। इंटरनेट का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए किया। खास बात यह है कि इस बार शीर्ष 150 में सिर्फ पांच मुस्लिम बेटियां हैं। इनमें एक नाम अरफा का भी है।
अरफा कहती हैं कि असफलता से घबराने की जरूरत नहीं है। मेरा चयन चौथे प्रयास में हुआ है। यानी तीन बार असफलता मिली, लेकिन प्रयास में कमी नहीं आई। हर विफलता से कुछ नया सीखा और गलती दोहराने की आदत से बचती चली गई। मॉक टेस्ट से परीक्षा में मदद मिली। इंसान में इतना जज्बा हो तो खुदा क्यों न बख्शिश दे।
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अरफा ने आईआईटी बीएचयू से 2018 में मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग की पढ़ाई पूरी की, फिर दो साल तक निजी कंपनी में जॉब की। यूपीएससी का पहला अटेंप्ट नौकरी करते ही दिया। असफलता मिली तो नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। अरफा ने परीक्षा के मेंस में समाजशास्त्र को वैकल्पिक विषय रखा था।
बास्केटबॉल की बेहतरीन खिलाड़ी
अरफा स्कूल से ही बास्केटबॉल की बेहतरीन खिलाड़ी थीं। बीएचयू में पढ़ते हुए कई टूर्नामेंट खेलने गईं और अपनी टीम को विजेता बनाया।