एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार ने जांच शुरू की तो शिकायत सही निकली। तहसीलदार ने डीएम को भेजी रिपोर्ट में लिखा है कि अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर लल्लू कहार जाति के हैं, जो वर्तमान समय में भी अन्य पिछड़े वर्ग में आती है। लेखपाल ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया और आवेदक के बारे में गहन जांच पड़ताल नहीं की। प्रथम दृष्टया लेखपाल के स्तर पर भी लापरवाही प्रतीत हो रही है, जिसके लिए लेखपाल को अलग से स्पष्टीकरण जारी किया जा रहा है। जांच से स्पष्ट है कि लल्लू निवासी सिकरवार ने तथ्यों को छिपाकर अपने पक्ष में अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निर्गत कराया है।
इस संदर्भ में राबर्ट्सगंज के तहसीलदार बृजेश वर्मा का कहना है कि जांच से स्पष्ट है कि लल्लू निवासी सिकरवार ने तथ्यों को छिपाकर अपने पक्ष में अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र निर्गत कराया है और इस प्रमाणपत्र का अनुचित लाभ प्राप्त किया है। लल्लू जाति के कहार हैं जो पिछड़ी जाति के अंतर्गत वर्गीकृत है। लिहाजा उनके पक्ष में निर्गत जाति प्रमाणपत्र को निरस्त करने की संस्तुति सहित आख्या भेज दी गई है।