यही कारण है कि जनवरी महीने में कई तारीख बढ़ने के बाद विकास प्राधिकरण ने दोनों परियोजनाओं की निविदा के लिए 31 मार्च तक का समय बढ़ा दिया है। यहां बता दें कि एकीकृत मंडलीय कार्यालय में 250 करोड़ रुपये और रोपवे में करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना है। सबसे अहम बात यह है कि इन दोनों ही परियोजनाओं में विदेशी मूल की कंपनियों ने रुचि दिखाई है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो विदेशी कंपनियां इतने बड़े निवेश से पहले प्रदेश सरकार के गठन पर भी स्थिति स्पष्ट करना चाहती है। कारण, परियोजना को पूरा करने में उन्हें सरकार के सहयोग में दिक्कत न आए। वाराणसी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष ईशा दुहन ने कहा कि रोपवे और कमिश्नरी बिल्डिंग की निविदा में निविदा कर्ताओं की कम रुचि के कारण इसकी समयसीमा 31 मार्च 2022 तक बढ़ाई गई है। इन परियोजनाओं को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर तैयार किया जाना है।
एकीकृत मंडलीय कार्यालय का स्वरूप
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के विकास में मील का पत्थर साबित होने वाली रोपवे और एकीकृत मंडलीय कार्यालय परियोजना में बड़े निवेश के बाद कार्यदायी संस्था को कई साल तक प्रोजेक्ट से जुड़ा रहना पड़ेगा। एकीकृत बिल्डिंग में बनने वाले दो टावर में एक इमारत सरकारी कार्यालय के लिए होगी और दूसरी इमारत कार्यदायी संस्था के उपयोग के लिए दी जाएगी। ऐसे में इतने बड़े निवेश से पहले कंपनियां हर हाल में सभी पहलुओं से संतुष्ट होना चाहती हैं।
-ईसीएल मैनेजमेंट एसडीएनडीएचडी
-डोपल्मेयर
-एफ़आइएल
-पोमा
-एक्रान इंफ्रा
-एजीस इंडिया
-कनवेयर एंड रोप-वे सिस्टम