पूर्वांचल हर हाल में फतह करने के लिए भाजपा ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने छोटे-छोटे दलों से गठबंधन कर उन्हें बड़ी हिस्सेदारी दे दी। सोमवार को मऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गठबंधन का महत्व फिर साफ कर दिया। स्पष्ट कह दिया- भाजपा गठबंधन के साथी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाएगी।
इस तरह पीएम ने गठबंधन में शामिल भासपा और अपना दल (एस) के पक्ष में प्रचार करने के साथ ही मतदाताओं को समझा दिया कि इन दोनों पार्टियों को दिए हुए उनके वोटों का पूरा सम्मान किया जाएगा। अकेले दम बहुमत मिलने पर सरकार बनी तो दूसरे दलों से जीतने वाले भी मंत्री बनाए जा सकते हैं। भाजपा के प्रत्याशी नहीं हैं तो मतदाता गठबंधन के प्रत्याशियों को विधानसभा भेजने में संकोच नहीं करें।
पूर्वांचल में जातिगत समीकरणों के लिहाज से किए गए इस गठबंधन की चुनाव में बड़ी परीक्षा होगी।
2012 के चुनाव में सपा के पक्ष में एकतरफा वोटिंग ने भाजपा की हालत खराब कर दी थी। उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्वांचल के राजनाथ सिंह थे। प्रदेश की कमान भी पूर्व मंत्री सूर्य प्रताप शाही के पास थी। बावजूद इसके आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, चंदौली, भदोही और सोनभद्र में जहां उसे एक भी सीट नहीं मिली थी, वहीं बलिया व जौनपुर में पार्टी एक-एक सीट पर सिमट गई थी।
वाराणसी में भाजपा के सबसे ज्यादा तीन उम्मीदवार जीते थे। बाद में अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने लोकसभा चुनाव में गठबंधन का प्रयोग सफल रहने पर भाजपा ने इसे विस्तार दे दिया। अद (एस) को भाजपा ने 12 सीटें दे दीं, जबकि भासपा के हिस्से आठ सीटें आई हैं।
जानकार कहते हैं कि पूर्वांचल में जातिगत समीकरणों के लिहाज से किए गए इस गठबंधन की चुनाव में बड़ी परीक्षा होगी। दरअसल, भासपा प्रत्याशियों के हारने पर पार्टी का वजूद खत्म हो सकता है। भाजपा की किरकिरी तो होगी ही, असंतुष्ट और निराश लोग बसपा में जगह तलाश सकते हैं।
इसी तरह अद (एस) के उम्मीदवारों की शिकस्त होने की सूरत में अनुप्रिया पटेल के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अनुप्रिया से नाराज पार्टी के नेता चुनाव के बाद कृष्णा पटेल के साथ जा सकते हैं।
अपना दल के लिए पूर्वांचल की सभी सीटें खास हैं।
घटक दलों ने 2012 में 179 सीट पर दिखाया था दम
2012 के चुनाव में अपना दल में मां-बेटी का विवाद नहीं था। तब अपना दल 137 सीट पर चुनाव मैदान में उतरा था। इनमें से ज्यादातर सीटें पूर्वांचल की थीं। पार्टी नौ सीटों पर दूसरे और 27 पर तीसरे स्थान पर रही थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने भाजपा से गठबंधन किया और मिर्जापुर और प्रतापगढ़ की सीट जीत ली थी।
उधर, भासपा ने कौमी एकता दल के साथ गठबंधन कर पिछले चुनाव में 42 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि पार्टी केवल तीन सीटों जहूराबाद (गाजीपुर), फेफना (बलिया) और शिवपुर (वाराणसी) में तीसरे स्थान पर रही थी।
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के साथ विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की प्रस्तावना अमित शाह ने लिखी थी। मऊ में सम्मेलन आयोजित कर इसकी घोषणा की गई थी। इसी तरह अपना दल के साथ गठबंधन का एलान करने के लिए शाह और अनुप्रिया पटेल ने रोहनिया में संयुक्त सम्मेलन किया था।
इसके बाद ही अनुप्रिया को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। शाह ने गठबंधन की मजबूती के लिए अनुप्रिया और उनकी मां कृष्णा पटेल में समझौता कराने की भी कोशिश की थी।,