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UP Board Exam: आधी-अधूरी तैयारियों के बीच जारी हुआ टाइमटेबल

Sun, 29 Oct 2017 06:30 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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यूपी बोर्ड परीक्षा - फोटो : demo
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यूपी बोर्ड ने आधी-अधूरी तैयारी के साथ ही बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। अभी तक न तो केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हो सकी है और न तो परीक्षकों की सूची ही तैयार हुई है। आलम यह है कि अभी तक विद्यालयों में आधा कोर्स भी पूरा नहीं हो सका है। कई स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं भी नहीं शुरू हो सकी हैं। यूपी बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों का सत्र अप्रैल से शुरू कराने के चक्कर में सूबे के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की तैयारी कर ली गई है। 
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विभागीय कार्यालय और शिक्षकों द्वारा बताया जा रहा है कि नवंबर में ही प्रायोगिक परीक्षाएं भी होनी हैं। बोर्ड स्तर से अभी तक विद्यालयों को परीक्षकों की सूची तक जारी नहीं की गई है। शिक्षकों के आधार कार्ड तक विद्यालयों द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

इस बार सत्र शुरू हुआ जुलाई में अगस्त तक दाखिले की कार्रवाई चली। सितंबर से कक्षाएं सुचारु रूप से शुरू हुईं और 15 नवंबर से प्रैक्टिकल की तिथियां घोषित हो गईं। ऐसे में यह आसानी से समझा जा सकता है कि छात्र-छात्राओं का कोेर्स कितना पूरा हुआ होगा।
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पाठ्यक्रम के संबंध में प्रधानाचार्यों व शिक्षकों ने भी गोलमोल जवाब दिया। अधिकांश प्रधानाचार्यों का कहना है कि उनके यहां लगभग 75 प्रतिशत कोर्स पूरा हो गया है तो कुछ ने इसे 60 फ ीसदी बताया। हालांकि यह कयास आसानी से लगाया जा सकता है कि जब स्कूलों में अभी तक अर्द्ध वार्षिक परीक्षा तक नहीं हुई हैं तो कोर्स कितना पूरा हुआ होगा।  अभी तक संबंधित परीक्षार्थियों की नामावली तक दुरुस्त नहीं हो सकी है।

गलतियों की भरमार
इस बार परीक्षा केंद्रों का निर्धारण बोर्ड मुख्यालय से होना है। इसके लिए बोर्ड मुख्यालय से सभी जिलों से ऑन लाइन सूचनाएं मांगी गई थीं। लेकिन आलम यह है कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के केंद्र निर्धारण के लिए अंतिम तिथि तक वाराणसी, आजमगढ़ और मिर्जापुर मंडल के 1260 विद्यालयों का डेटा अपलोड नहीं किया जा सका था। जिन विद्यालयों का विवरण ऑनलाइन किया गया है उसमें गलतियों की भरमार है।
 
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कोई बता रहा सही तो कोई बता रहा गलत

यूपी बोर्ड परीक्षा - फोटो : self
वाराणसी जिला विद्यालय निरीक्षक ओमप्रकाश राय ने कहा कि स्कूल स्तर से डाटा अपलोडिंग में जो गड़बड़ी की गई है उसकी सूचना जैसे-जैसे मुख्यालय से प्राप्त हो रही है उसे दूर करा कर अपडेट किया जा रहा है। डाटा फीडिंग की गड़बड़ियों को सप्ताह भर के अंदर दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। 

यूपी बोर्ड के इस फैसले पर शिक्षकों ने भी अपनी राय दी है। भूगोल प्रवक्ता एवं पूर्व शिक्षक विधायक डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र ने कहा कि ऐसी भी क्या हड़बड़ी थी कि कोर्स का ध्यान दिए बगैर सत्र नियमन पर कहीं ज्यादा ध्यान दिया गया। जुलाई में सत्र शुरू हुआ। अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया चली।

सितंबर से कक्षाएं शुरू हुईं और 15 नवंबर से प्रैक्टिकल होंगे। बचे दो महीने दिसंबर और जनवरी, ऐसे में किस गणित से कोर्स पूरा हो जाएगा। कौन सी कंप्यूटराइज तकनीक से पढ़ाई होगी। ये समझ से बाहर है। बोर्ड का यह फैसला किसी कीमत पर छात्रहित में नहीं है।

सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के प्रधानचार्य व प्रधानाचार्य संघ के प्रदेश संयोजक डॉ विश्वनाथ दूबे ने कहा कि अप्रैल से सत्र शुरू करने के लिए फरवरी में परीक्षा कराने का बोर्ड का फैसला सही है। यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था। यह जरूर है कि इतनी जल्दी हो रही परीक्षा के लिए छात्रों और अभिभावकों को खुद को समायोजित करना होगा।

राज्य में अवकाश में हुई कटौती से अध्ययन-अध्यापन का मौका पहले से ज्यादा मिला है। नवंबर में प्रैक्टिकल हो जाने से दिसंबर व जनवरी में पढ़ाई का मौका मिलेगा। ऐसा पहली बार होगा। अर्धवार्षिक परीक्षाएं 15 नवंबर तक पूरी होंगी। कोर्स 75 फीसदी पूरा है। 
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