उत्तर प्रदेश के बलिया के नगरा में मंगलवार को पूर्व विधायक और भाजपा कार्यसमिति के सदस्य राम इकबाल ने कहा कि प्रतिहार राजा मिहिरभोज की प्रतिमा पर सम्राट गुर्जर लिखे जाने से पश्चिम के क्षत्रिय वर्ग में काफी नाराजगी है। मुख्यमंत्री से गुजारिश है कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश न करें। स्टेशन, जिले का नाम बदलते-बदलते कुल खानदान बदलने की गलती न करें। ऐसी गलती को इतिहास माफ नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि मिहिरभोज प्रतिहार वंश के सर्वाधिक शक्तिशाली राजा थे। प्रतिहार वंश की नींव 725 ईस्वी में नागभट्ट प्रथम ने रखी थी। ज्यादातर विद्वान यह मानते हैं कि प्रतिहारों के राजनीतिक शक्ति का उदय राजस्थान के दक्षिण पूर्व गुर्जर प्रदेशों में हुआ था। इसलिए स्थान के नाम पर प्रतिहार के आगे गुर्जर शब्द का प्रयोग किया। प्रतिहारों की उत्पत्ति अग्निकुंड से हुई है। ऋषि वशिष्ठ की यज्ञ वेदी से उत्पन्न चार राजपूत वंशों प्रतिहार, परमार, चौहान, चालुक्य को माना गया है। उन्होंने राजपूतों की नींव रखी थी। इसलिए प्रतिहारों को राजपूत ही माना जाता है। शहर, स्टेशन का नाम बदलना तो समझ में आता है लेकिन प्रतिहार राजा मिहिर भोज की प्रतिमा पर सम्राट गुर्जर लिखवाना समझ से परे है।