देश और दुनिया के सबसे प्राचीन जिलों में शुमार वाराणसी का अपना अलग अंदाज है। ये जिला धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से काफी समृद्ध है। पूरी दुनिया में वाराणसी की चर्चा होती है। काशी विश्वनाथ, मां गंगा की इस आध्यात्मिक नगरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहां से सांसद चुनकर संसद भेजा है। दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 700 करोड़ रुपये से बने काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया है। इसके बाद से यहां राजनीतिक हलचलें काफी बढ़ गई हैं।
वाराणसी में आठ विधानसभा क्षेत्र
वाराणसी में आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में इनमें से छह सीटों पर भारतीय जनता पार्टी, एक पर अपना दल (सोनेलाल) और एक पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रत्याशी की जीत हुई थी। चुनाव के दौरान सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल (सोनेलाल) का भाजपा से गठबंधन हुआ था। दो साल बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने गठबंधन तोड़ दिया था। इस बार सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का एलान किया है।
सियासी माहौल गर्म होने लगा
अब एक बार फिर से वाराणसी का सियासी माहौल गर्म होने लगा है। अगले साल चुनाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि योगी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में यहां कितना विकास हुआ? क्या आम लोग सरकार के कामकाज से खुश हैं? युवा महिलाएं और आम जनता मौजूदा सरकार के बारे में क्या सोचती है? राजनीतिक दलों के नेताओं का क्या मानना है? वह किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे? इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' बुधवार को वाराणसी में होगा।
आप भी 'अमर उजाला' के इस मंच से जुड़ सकते हैं। इसके जरिए आप अपने क्षेत्र, शहर, राज्य और देश के हर मुद्दों को उठा पाएंगे। आप बता पाएंगे कि आने वाले चुनाव में नेताओं और राजनीतिक दलों से आपको क्या उम्मीदें हैं? किन मसलों को लेकर आप मतदान करेंगे और नेताओं से आप क्या चाहते हैं?
कब और कहां होंगे कार्यक्रम?
1. सुबह 9 बजे
चाय पर चर्चा
स्थान : पप्पू की अड़ी, अस्सी घाट
2. सुबह 11 बजे
युवाओं से बातचीत
स्थान : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय परिसर
3. दोपहर 1 बजे
महिलाओं से चर्चा
स्थान : दशाश्वमेध घाट
4. शाम 4 बजे
राजनीतिक दलों से चर्चा
स्थान : अस्सी घाट
अब तक 30 जिलों में हो चुका है कार्यक्रम
अब तक पश्चिमी यूपी, ब्रज, अवध और पूर्वांचल के 30 जिलों में ‘सत्ता का संग्राम’ आयोजित हो चुका है। 11 नवंबर को गाजियाबाद से चला रथ मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, मैनपुरी, एटा, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़ होते हुए एक दिसंबर को बुलंदशहर पहुंचा था। इसके बाद हमारा चुनावी रथ अवध और फिर पूर्वांचल में दाखिल हुआ। यह रथ लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर होते हुए अब वाराणसी पहुंचेगा।
‘सत्ता का संग्राम’ में क्या होगा खास?
चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ के तहत अमर उजाला हर वर्ग के मतदाताओं तक पहुंचेगा। चाय पर चर्चा के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं से संवाद होगा। राजनीतिक हस्तियों से सीधे सवाल पूछे जाएंगे। अमर उजाला आपको एक मंच दे रहा है, जहां आप बातों को रख सकेंगे, ताकि जब राजनीतिक हस्तियां चुनावी रैलियां करने आएं तो उन्हें आपसे जुड़े जमीनी मुद्दे भी याद रहें।
विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था
‘सत्ता का संग्राम’ से जुड़े कार्यक्रमों में जमीनी स्तर पर हिस्सा लेने वाले दर्शकों और श्रोताओं के लिए विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है।
इस विशेष कवरेज को आप कहां देख सकेंगे?
- अमर उजाला अखबार और amarujala.com पर आपको कार्यक्रम स्थल की जानकारी मिलेगी।
- ‘सत्ता का संग्राम’ से जुड़ी व्यापक जमीनी कवरेज आप अमर उजाला अखबार में पढ़ सकेंगे।
- amarujala.com पर आप कार्यक्रमों को लाइव देख सकेंगे।
- सभी कार्यक्रम अमर उजाला डिजिटल के फेसबुक पेज और यू-ट्यूब चैनल पर देखे जा सकेंगे।
- इन सभी कार्यक्रमों के जरिए दर्ज होने वाली जनता की आवाज विशेष रूप से अमर
- उजाला के पॉडकास्ट ‘आवाज’ पर भी उपलब्ध रहेगी।