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कैनवास पर जीवंत हो रहे है गुमनाम क्रांतिकारी

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संस्कार भारती की ओर से राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन रोहनिया में किया जा रहा है। प्रदेश भर के 40 कलाकार गुमनाम 80 क्रांतिकारियों के चित्रों को कैनवास पर उकेर रहे हैं। इसमें लाला, उदा देवी, गंगू मेहतर, रामप्यारी गुर्जर, उदया, भाई परमानंद, कस्तूरी बाई, धानसिंह गुज्जर, शहीद जमीदार सिंह, बांके मेहतर की कुर्बानियों के किस्से जीवंत हो रहे हैं।
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चित्रकार वीरेंद्र वर्मा के संयोजन में कानपुर से सुमित ठाकुर, आगरा से ममता बंसल, डॉ. एकता, अलीगढ़ से डॉ. अनंता शांडिल्य, जौनपुर से नवीन विश्वकर्मा, मऊ से आजाद कपूर, बलदाऊ वर्मा, आजमगढ़ से प्रियतम कुमार गौतम और ज्योति भास्कर, लखनऊ से सिद्धार्थ देव, अमनदीप और नूतन किशोर हिस्सा ले रहे हैं। बनारस से डॉ. एस. प्रणाम सिंह, प्रो. सरोज रानी, पं. वेदप्रकाश मिश्रा, डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, शशिकांत नाग, दीक्षा जायसवाल, सीमा गुप्ता, श्वेता मौर्या, मुन्नू प्रसाद, संजय कुमार, आशा, सुरेश कुमार सौरभ, डॉ. शुत्रुध्न प्रसाद प्रमुख हैं। उद्घाटन पर संस्कार भारती के संस्थापक पद्मश्री बाबा योगेंद्र, उप्र. ललित कला अकादमी के अध्यक्ष सीताराम कश्यप, डॉ. डीपी. सिंह, गणेश अवस्थी, सूर्यकांत जालान और नीरज अग्रवाल उपस्थित रहे।
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