काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि भारत एक दर्शन व विचार है। भारत ने संपूर्ण विश्व को ज्ञान का मार्ग दिखाया है। भारत ने विश्व के लिए स्वयं को समर्पित किया है। हमारे मनीषियाें का ज्ञान था कि हम देश हित के बारे में सोचें ना कि अपने परिवार व जाति के बारे में।
वह शुक्रवार को धर्मसंघ परिसर में मनीष परिषद की ओर से आयोजित मनीषी रत्न समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र ने विद्वानों को मनीषी रत्न से सम्मानित किया। डॉ. विभा मिश्रा, डॉ. पीसी शर्मा, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, पं. राधे मोहन त्रिपाठी, पं. संतोष मिश्र, प्रो. नागेंद्र पांडेय, संगीता पंडित, चंद्रभूषण पांडेय, धर्मसंघ के मंत्री जगजीतन पांडेय, पं. विकास महाराज को मनीषी रत्न दिया गया। इसके उपरांत केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने मणि मंदिर में शीश नवाया।
सबसे पहले श्रीराम दरबार में मत्था टेका फिर धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद संत निवास पहुंचकर धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज से भी आशीष प्राप्त किया।
इस दौरान धर्मसंघ पीठाधीश्वर ने पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के हो रहे उत्पीड़न का प्रश्न उठाया और उन्हें समुचित सुरक्षा प्रदान करने की बात भी कही। गृह राज्यमंत्री ने कहा कि करपात्री जी की तपोस्थली पर आकर खुद को धन्य महसूस कर रहा हूं। संतो की कृपा से ही हम ऐसी पुण्यभूमि पर आ पाते हैं।