मनोज ने बताया कि घर में पांच सदस्य हैं, माता-पिता, मैं, पत्नी और डेढ़ साल का बच्चा, थोड़ी बहुत खेतीबाड़ी और छोटी सी दुकान है। जैसे तैसे स्नातक की पढ़ाई पूरी की। आईएएस बनाने की इच्छा थी, लेकिन आर्थिक स्थति और परिवार की समस्याओं ने राहें रोक दीं। मैने ठाना कि जिस गरीबी की मार हमें झेलनी पड़ी वह किसी और गरीब बच्चे को न झेलनी पड़े। कोई कभी-कभी 500 या 1000 की मदद दे देता तो कोई कॉपी और पेन देकर सहयोग कर देता है। दस किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाली हर मलिन बस्ती में जा-जाकर मैं बच्चों को शिक्षित कर रहा हूं।
मनोज गरीब बच्चों को मलीन बस्तियों और झुग्गी झोपड़ियों में जाकर पढ़ाने के साथ यू-ट्यूब पर भी सक्रिय हैं। मनोज ने बताया यू-ट्यूब पर एक चैनल ‘मनोज यादव सोशल वर्कर’ बनाया है। इसके माध्यम से भी कक्षाएं संचालित करता हूं। ताकि मेरे वीडियो से लोग गरीब बच्चों के शिक्षा के लिए संपर्क कर सकें और चैनल से जुड़कर शिक्षा की इस मुहिम में सहभागी बन सके।