इससे पहले गौरी शंकर खुद अपने कॉलेज के दिनों में फुटबाल, बैडमिंटन और हॉकी विश्वविद्यालय स्तर पर खेला। यूपी कॉलेज में जीव विज्ञान के प्रवक्ता रहे गौरी शंकर सिंह 2001 में सेवानिवृत्त हुए। उसके बाद उन्होंने पीएफ की राशि (12.5 लाख) से हरहुआ के पास करोमा में छह बीघा जमीन में खेल मैदान तैयार कराया। जहां वर्तमान में 70 बच्चे हॉकी के गुर सीखते हैं।
मास्टर गौरी शंकर और उनकी पत्नी पद्मा सिंह (राष्ट्रीय स्तर की एथलीट) ने अपने बच्चों से पूछा कि आगे क्या करना है? सभी ने जवाब दिया खेलना है। दो बेटे स्वर्गीय विवेक सिंह और राहुल सिंह हॉकी में ओलंपिक तक पहुंचे। प्रशांत सिंह ने हॉकी में व राजन सिंह ने बैडमिंटन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कौशल दिखाया। अनन्य सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन में और सीमांत सिंह ने रणजी ट्रॉफी में नाम कमाया।
यहां करीब 150 बच्चे आज हॉकी के गुर सीखते हैं। वह प्रतिदिन 20 किलोमीटर दूरी तय कर खेल मैदान पर जाते हैं। खास यह कि इसके लिए सरकारी मदद नहीं ली। खेल में योगदान को लेकर 2011 में इनके ऊपर ‘एंड वी प्ले ऑन’ नाम से बनी गैर फीचर फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।