सांसद अतुल राय पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने के बाद पीड़िता और उसके गवाह ने मौत से पहले तक लंबी लड़ाई लड़ी। एक मई 2019 को मुकदमा दर्ज कराने के बाद से पीड़िता न्याय के लिए अपने गवाह के साथ मुखर रही। यही कारण है कि पीड़िता और गवाह पर भी न सिर्फ मुकदमा हुआ, बल्कि उन पर गिरफ्तारी की तलवार तक लटकी। दो साल में चार मुकदमों ने पुलिस को उलझाए रखा और पीड़िता इस दौरान परेशान ही रही। पुलिस पर गंभीर आरोप लगाकर आत्मदाह करने वाली पीड़िता और उसके गवाह की मौत ने वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
बलिया जिले की निवासी दुष्कर्म पीड़िता ने वाराणसी की लंका पुलिस को बताया था कि वह वाराणसी के यूपी कॉलेज में पढ़ती है। साल 2015 में वह यूपी कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री का चुनाव भी लड़ी, लेकिन हार गई थी। उसी दौरान गाजीपुर जिले के भांवरकोल थाना के बीरपुर गांव निवासी सांसद अतुल राय के संपर्क में आई थी। इसके बाद अतुल उसे कॉल और मैसेज करने लगा।
पीड़िता के अनुसार, उसके पिता की मौत हो गई थी और उसका एक छोटा भाई है। उसकी मां की तबीयत ठीक नहीं रहती है। इसे लेकर अतुल कहता था कि तुम अच्छे से पढ़ो और कभी किसी चीज की कमी महसूस मत करना। 2018 में उसने वाराणसी में अपने फ्लैट पर दुष्कर्म किया और एक मई 2019 को पीड़िता ने लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद 23 नवंबर 2020 को सांसद के भाई ने पीड़िता और उसके गवाह के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में पीड़िता और गवाह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद वे दोनों ज्यादा परेशान थे। दो अगस्त 2021 को गैरजमानती वांरट जारी होने के बाद पुलिस उनकी गिरफ्तारी में भी जुट गई थी। दूसरी तरफ दो दिसंबर 2020 को दुष्कर्म मामले के गवाह ने शोभित सिंह और शुभम पर मुकदमा दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि अतुल राय के खिलाफ गवाही देने पर जाम से मारने की धमकी दी जा रही है। इसके दो दिन बाद ही चार दिसंबर 2020 को पीड़िता ने सांसद अतुल राय और सुधीर कुमार के खिलाफ सोशल मीडिया पर चरित्रहीन टिप्पणी करने का मुकदमा दर्ज कराया था। इन मामलों में पुलिस जांच भी सवालों के घेरे में है।
जांच आख्या पर टिप्पणी करने वाले सीओ हुए थे निलंबित
सांसद अतुल राय के मामले में तत्कालीन सीओ भेलूपुर अमरेश सिंह बघेल की जांच रिपोर्ट चर्चा में आई थी। उसमें सीओ की जांच सांसद अतुल राय के पक्ष में थी और इस मामले में सीओ ने अपनी जांच पर ही पीड़िता पर टिप्पणी की थी। इसके बाद शासन ने सीओ अमरेश सिंह बघेल को निलंबित कर दिया था और इस मामले की जांच आईजी रेंज प्रयागराज को सौंपी है।
कई सफोदपेश सांसद के सागिर्द, युवाओं की भी लंबी टीम
सांसद अतुल राय का वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल में मजबूत नेटवर्क है। प्रयागराज के नैनी जेल में बंद सांसद अतुल राय का मोबाइल टावर से लेकर ठेके आदि का पूरा कारोबार वाराणसी के कई सफेदपोश संभालते हैं। पंचायत चुनाव में भी सांसद की टीम पूरी टीम सक्रिय थी और कई अपने लोगों की जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर भी लगाया था। इसके अलावा युवाओं की भी लंबी टीम सांसद से जुड़ी है। यहां बता दें कि अतुल राय की पहचान मऊ सदर विधायक माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी के तौर पर होती थी। मुख्तार अंसारी गिरोह के ठेकों की देखरेख के साथ ही कई अन्य काम भी अतुल राय की ही निगरानी में होते थे। हालांकि अब अतुल राय और उसके परिजन उसकी जान को मुख्तार अंसारी और उसके गुर्गों से खतरा बताते हैं।
पीड़िता और उसके गवाह के सभी मुकदमों में चार्जशीट लग चुकी है। शासन की टीम इस मामले की जांच कर रही है। पीड़िता और गवाह से जुड़े मामलों के सभी पहलू देखे जा रहे हैं।-ए सतीश गणेश, पुलिस आयुक्त, वाराणसी कमिश्नरेट