शवदाह गृह का स्वरूप एक बड़े बाक्स की तरह होता है, इसकी दीवारें फायर ब्रिक्स (अभ्रक की ईंट) की बनी होती हैैं। चारों ओर से बंद इस बाक्स में एक चिमनी लगी होती है। बाक्स में एक स्ट्रेचरनुमा ट्राली होती है, जिस पर पहले लकड़ी, फिर शव और उसके ऊपर लकड़ी रखी जाती है। सभी रीति रिवाज पूरे करने के बाद शव को मुखाग्नि देकर स्ट्रेचर को बाक्स के अंदर बंद कर दिया जाता है।
फायर ब्रिक्स की खासियत यह है कि लकड़ी का ताप अवशोषित नहीं होता, बल्कि उत्सर्जित होता है। इस कारण एक क्विंटल लकड़ी से इतना ताप पैदा होता है कि शव सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरी तरह जल जाता है। चिमनी के ऊपर वाटर स्प्रिंकल (पानी का फव्वारा) लगा होता है, जो शव दहन से पैदा हुए धुएं पर पड़ता है। इससे धुएं की राख वायुमंडल तक पहुंचने के बजाय वहीं बैठ जाती हैैं। धुआं भी फिल्टर से होकर वायुमंडल तक पहुंचता है। इससे वायु प्रदूषण भी काफी कम होता है।