हरि प्रबोधिनी या देवउठनी एकादशी गुरुवार को मनाई जाएगी। हरि प्रबोधिनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक तुलसी का विशेष विधान के साथ पूजन-अर्चन होगा। भगवान शालिग्राम-तुलसी विवाह होगा। घर से लेकर घाटों तक तुलसी विवाह के आयोजन होंगे। पंचगंगा घाट पर बरात निकलेगी और शहनाई की धुन गूंजेगी।
वेदों में कार्तिक मास में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। विवाह का आयोजन भगवान के शालीग्राम अवतार के साथ होता है। मान्यता है कि तुलसी विवाह करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा बरसती है। शहर में भी घरों के अलावा घाटों पर तुलसी विवाह के आयोजन होते हैं। लोग एकादशी का स्नान करने के साथ माता तुलसी का पूजन कर शालिग्राम-तुलसी विवाह की परंपरा को निभाएंगे।
काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी 22 नवंबर को रात में 11:05 बजे से अगले दिन 23 नवंबर को रात 9:03 बजे तक रहेगी। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार 23 नवंबर को मृत्युलोक पर सुबह 9:27 से रात में 8:11 बजे तक भद्रा लग रहा है। इसलिए भद्राकाल में तुलसी विवाह नहीं हो सकता है। तुलसी विवाह का मुहूर्त 23 नवंबर को सुबह 7:57 से 9:27 बजे तक है। जबकि इसी दिन भगवान के प्रबोधन का समय सुबह 7:57 बजे है। हालांकि एकादशी पर स्थिर संज्ञक नक्षत्र होने से शुभ भी है।
संतों के सानिध्य में होगा विशेष आयोजन
पंचगंगा घाट स्थित श्रीमठ में बृहस्पतिवार को तुलसी विवाह होगा। मठ के सेवक उपेंद्र मिश्र ने बताया कि गोधुलि वेला में गणेश घाट से श्रीमठ तक गाजेबाजे के साथ बरात निकाली जाएगी। शहनाई, बैंडबाजा आदि वाद्ययंत्रों के साथ बरात मठ पहुंचेगी, जहां रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य के सानिध्य में द्वारपूजा होगी। पूजन-अर्चन के साथ ही विधिवत शालिग्राम-तुलसी विवाह होगा। तुलसीघाट पर संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के सानिध्य में तुलसी विवाह होगा। अस्सी घाट, आदिकेशव घाट व दशाश्वमेध घाट पर भी काफी भीड़ होगी। शहर के विष्णु मंदिरों में भी पूजन अर्चन व तुलसी विवाह होगा।
तुलसी पूजन है फलदायी
हिंदू धर्म तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है। ज्योतिषविद विमल जैन व आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार जिस घर में तुलसीजी पर जल अर्पण और शाम को दीप जलाए जाते हैं, वहां हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है। उस घर में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का वास रहता है।
ऐसे करें विवाह
लकड़ी की चौकी को साफ कर उस पर गंगाजल छिड़ककर आसन बिछाएं। कलश में पवित्र जल भरें और आम के पत्ते लगाकर पूजा के स्थान पर स्थापित करें। फिर एक आसन पर तुलसी जी और दूसरे पर शालिग्राम जी को स्थापित करें। गंगाजल से तुलसी जी और शालिग्राम जी को स्नान कराएं। चुनरी आदि नैवेद्य अर्पित कर विधिवत पूजन करें। इस दौरान तुलसी स्तोत्र और तुलसी चालीसा का पाठ करें। ब्राह्मणों को दान देने, रात्रि जागरण भी करना चाहिए।