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इमरजेंसी में दो बेड पर चार बच्चों का इलाज, परिजन लाचार

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बीएचयू अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज का दावा लगातार किया जाता है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के हिसाब से व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। सबसे अधिक परेशानी बच्चों के इलाज में हो रही है। इमरजेंसी के चिल्ड्रेन वार्ड में तो परिजन जैसे-तैसे बच्चों का इलाज कराने को मजबूर हैं। पिछले दिनों मेज पर दो बच्चों के इलाज के बाद सोमवार को चिल्ड्रेन वार्ड में एक नहीं बल्कि दो-दो बेड पर दो बच्चे भर्ती मिले। मौसम में बदलाव और डेंगू की वजह से बीमार बच्चों की संख्या बढ़ी है। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में चिल्ड्रेन वार्ड फुल होने के साथ ही शास्त्री अस्पताल रामनगर में भी भर्ती मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक है। इधर, बीएचयू अस्पताल की बात करें तो पिछले एक सप्ताह से चिल्ड्रेन वार्ड में बेड फुल हैं। न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जिलों के साथ ही बिहार तक के बच्चे भर्ती हैं। इसमें सांस लेने में तकलीफ होने की वजह से बच्चों को ऑक्सीजन भी लगाया गया है। 25 बेड वाले चिल्ड्रेन वार्ड में शनिवार को बेड नंबर 18 और 23 पर एक ही बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती किया गया था। परिजन भी क्या करते, बीमार बच्चों का बेहतर इलाज कराने के लिए लेकर आए थे। ऐसे में डॉक्टरों ने जांच, परामर्श के बाद जहां भर्ती किया, वहां इलाज करवा रहे हैं।
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बेड बढ़े तो मिलेगी राहत
जिस तरह से इमरजेंसी में बच्चों की संख्या बढ़ रही है, उस हिसाब से बेड नाकाफी हैं। पिछले दिनों अमर उजाला में खबर छपने के बाद बाल रोग विभाग के अध्यक्ष ने बेड बढ़ाने के लिए भी चिकित्सा अधीक्षक से बात की थी। अब अगर बेड बढ़ाने की पहल की जाए तो कुछ हद तक उन बच्चों को राहत मिलेगी, जिन्हें मजबूरी में एक ही बेड पर भर्ती होना पड़ रहा है।
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