लगातार हो रही ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने हाईटेक निगहबानी की तैयारी शुरू कर दी है। अब रेल इंजन और पटरी पर कैमरे और सेंसर्स के जरिए इस पर नजर रखी जाएगी। डीजल रेल कारखाना (डीरेका) ऐसे रेल इंजन बना रहा है, जिनमें अंदर और बाहर कैमरे लगाने के साथ ही चेहरे पहचानने वाले सॉफ्टवेयर इंस्टाल होंगे।
सॉफ्टवेयर जरूरत पड़ने पर पायलट को चेतावनी तो जारी करेंगे ही, दुर्घटना के बाद जवाबदेही तय करने में भी मदद करेंगे। दिसंबर तक डीरेका ऐसे पांच डीजल इंजन बना लेगा, जो ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन में सहयोगी होंगे। रेल इंजनों को कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर से लैस किया जा रहा है।
एक रेल इंजन में छह वीडियो कैमरे लगेंगे, जो हर मौसम में चौबीसो घंटे फोटो व वीडियो बनाने में सक्षम होंगे। कोहरे के दौरान भी इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। इनसे ट्रेन के सामने और केबिन पर नजर रखी जाएगी। कैमरों में चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर होंगे, जो पॉयलट के सजग न रहने या झपकी की स्थिति में अलर्ट भेजेंगे।
डीरेका में विकसित इस तकनीक को लोको कैब वीडियो एंड वॉयस रिकॉर्डिंग सिस्टम (एलसीवीआर) नाम दिया गया है। इसमें वीडियो कैमरा, माइक्रोफोन और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर है। वॉयस रिकॉर्डर के जरिए पायलट और अन्य संबंधित के बीच होने वाली बातचीत का ब्योरा किसी जांच के दौरान उपलब्ध हो सकेगा।
भविष्य में कैमरों को लोको कंट्रोल कंप्यूटर से जोड़ा जाएगा। सर्वर से सीधे जुड़ने पर कहीं से भी ट्रेन के अंदर या बाहर ऑनलाइन देखा जा सकेगा।
अधिकारियों का दावा है कि इससे पायलट पर नजर रखने और रेल दुर्घटनाओं का सही-सही कारण जानने में मदद मिलेगी।
चेहरा पहचानने वाला सॉफ्टवेयर किसी तरह की जोखिम देखकर लोको कैब और ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर्स को अलर्ट कर देगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 25 डीजल रेल इंजनों में कैमरे लगाए जाएंगे।
दिसंबर तक पांच ट्रेनों के इंजन में यह कैमरे लग जाएंगे। एक रेल इंजन में यह सिस्टम लगाने पर लगभग 3.2 लाख रुपये खर्च होंगे।