मां अन्नपूर्णा के दर्शन
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मान्यता है कि काशी नगरी के पालन-पोषण के लिए देवाधिदेव ने मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। मंदिर के गर्भगृह में मां अन्नपूर्णा की ममतामयी छवियुक्त ठोस स्वर्ण प्रतिमा कमलासन पर विराजमान और रजत शिल्प में ढले भगवान शिव की झोली में अन्नदान की मुद्रा में हैं। दायीं ओर मां लक्ष्मी और बायीं तरफ भूदेवी का स्वर्ण विग्रह है। इस दरबार के दर्शन वर्ष में सिर्फ चार दिन धनतेरस से अन्नकूट तक ही होते हैं।
पहली बार भक्तों को मिल रहा चांदी का सिक्का
मां अन्नपूर्णा के दरबार में पहली बार भक्तों को चांदी का सिक्का प्रसाद के रूप में मिला। जिन भक्तों के हाथ में चांदी का सिक्का आया उन्होंने उसे सिर माथे लगाया। माता के दर्शन के लिए देश भर के कई राज्यों के अलावा पूर्वांचल के कई जिलों से भक्तों ने माता के दरबार में हाजिरी लगाई।